उत्तर मुंबई में पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के प्रयासों से ₹246 करोड़ का दहिसर नदी पुनर्जीवन प्रोजेक्ट अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। मई 2024 में लोकसभा सांसद बनने के बाद से गोयल द्वारा लगातार की गई समीक्षा बैठकों के चलते इस प्रोजेक्ट को गति मिली है। दहिसर नदी के इस पुनर्जीवन प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य सीवेज को रोकना, पानी की गुणवत्ता सुधारना और नदी को स्वच्छ व स्वस्थ बनाना है। इसके तहत आधुनिक तकनीक से लैस सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए गए हैं।
इंदिरा नगर में 5.0 MLD और सुकुरवाड़ी में 1.5 MLD जैसे दो अत्याधुनिक ऑटोमेटेड STP का निर्माण पूरा हो चुका है। ये प्लांट उन्नत मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर (MBR) तकनीक पर आधारित हैं। फिलहाल इनके कमीशनिंग और हैंडओवर की प्रक्रिया चल रही है। इन प्लांट्स से ट्रीट किया गया पानी बागवानी, सड़क सफाई और अन्य गैर-पीने योग्य उपयोगों में लिया जाएगा, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
करीब 12 किलोमीटर लंबी यह दहिसर नदी तुलसी झील से मनोर क्रीक तक फैली हुई है और वर्षों से गंदगी और अव्यवस्थित सीवेज के कारण प्रदूषित हो चुकी थी। 26 जुलाई 2005 की मुंबई बाढ़ के बाद चितले समिति ने इसके पुनर्जीवन की सिफारिश की थी।
इस परियोजना के तहत 4.75 किलोमीटर नदी क्षेत्र का सुधार, 4.4 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन का निर्माण, इंटरसेप्टर सिस्टम के जरिए गंदे पानी का डायवर्जन, सर्विस रोड और सड़क किनारे ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण किया जाएगा। इन कदमों से न सिर्फ नदी की स्थिति सुधरेगी, बल्कि बाढ़ की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
परियोजना की प्रगति के लिए मल्टी-डिपार्टमेंट रिव्यू मैकेनिज्म बनाया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी मिलकर समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। साथ ही, लोक कल्याण कार्यालय के जरिए नियमित निगरानी से काम में तेजी आई है। इस मौके परपीयूष गोयल ने कहा, “हमारी प्राथमिकता बाढ़ को रोकना और उत्तर मुंबई के लोगों को होने वाली परेशानियों को कम करना है।”
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