RJD में नई सियासी पारी की शुरुआत: तेजस्वी यादव बने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

बहन रोहिणी आचार्य का तीखा तंज

RJD में नई सियासी पारी की शुरुआत: तेजस्वी यादव बने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

A new political chapter begins in RJD: Tejashwi Yadav becomes the national working president.

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने शुक्रवार (23 जनवरी )को पूर्व बिहार उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को पार्टी का नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया। इस फैसले के साथ ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत मिला है, ऐसे समय में जब RJD बिहार की राजनीति में अपनी रणनीति को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रही है।

तेजस्वी यादव की नियुक्ति की घोषणा पटना में आयोजित RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के उद्घाटन सत्र में की गई। पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपने पुत्र तेजस्वी यादव को नियुक्ति पत्र सौंपा। इस मौके पर उनकी मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी मौजूद थीं। RJD ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “एक नए युग की शुरुआत! तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय जनता दल का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।”

36 वर्षीय तेजस्वी यादव की यह पदोन्नति पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और रोजमर्रा के निर्णयों पर उनकी पकड़ को और मजबूत करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम RJD को युवा नेतृत्व के तहत पुनर्गठित करने और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

हालांकि, तेजस्वी यादव का यह उभार परिवार के भीतर ही विवाद का कारण भी बन गया। उनकी बहन रोहिणी आचार्य, जो 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में RJD की करारी हार के बाद राजनीति से सार्वजनिक रूप से दूरी बना चुकी हैं और मातृ पक्ष से संबंध तोड़ चुकी हैं, ने इस नियुक्ति पर तीखी प्रतिक्रिया दी। रोहिणी आचार्य ने एक्स पर एक बिना नाम लिए किए गए पोस्ट में पार्टी के अंदरूनी नेतृत्व और समर्थकों पर निशाना साधा।

उन्होंने हिंदी में लिखा, “सियासत के शिखर – पुरुष की गौरवशाली पारी का एक तरह से पटाक्षेप , ठकुरसुहाती करने वालों और “गिरोह – ए – घुसपैठ” को उनके हाथों की “कठपुतली बने शहजादा” की ताजपोशी मुबारक…” इस टिप्पणी को पार्टी के भीतर बढ़ते सत्ता संघर्ष और असंतोष के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

तेजस्वी यादव का बिहार की राजनीति में प्रवेश पारंपरिक राजनीतिक प्रशिक्षण के जरिए नहीं, बल्कि विरासत और परिस्थितियों के दबाव में हुआ। RJD संस्थापक लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी ने क्रिकेट में एक संक्षिप्त करियर के बाद राजनीति में कदम रखा। चारा घोटाले के मामलों में लालू प्रसाद के जेल जाने के बाद तेजस्वी को नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी।

2015 में वह नीतीश कुमार के साथ महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। मात्र 26 वर्ष की उम्र में वह देश के सबसे युवा उपमुख्यमंत्रियों में शामिल थे और उनके पास सड़क निर्माण और लोक निर्माण जैसे अहम विभाग थे। 2017 में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते नीतीश कुमार के गठबंधन से अलग होने के बाद तेजस्वी को विपक्ष की भूमिका में जाना पड़ा।

इसके बाद उन्होंने RJD संगठन को फिर से खड़ा करने, चुनावी संदेश को धार देने और NDA के खिलाफ खुद को मुख्य चुनौती के रूप में स्थापित करने की कोशिश की। 2020 के विधानसभा चुनावों में RJD सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, हालांकि सरकार बनाने से चूक गई। 2022 में नीतीश कुमार की वापसी के साथ तेजस्वी यादव फिर से उपमुख्यमंत्री बने।

तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति RJD के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है, लेकिन साथ ही यह पार्टी के भीतर और बाहर सियासी बहसों को भी जन्म दे रही है।

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