आम आदमी पार्टी (AAP) में राज्यसभा स्तर पर हुई बड़ी टूट के बाद पार्टी ने अपनी अगली रणनीति तय करने के लिए मंथन शुरू किया है। शुक्रवार(24 अप्रैल) देर रात वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली में पार्टी संयोजक अरविन्द केजरीवाल से उनके आवास पर मुलाकात की और मौजूदा राजनीतिक संकट पर चर्चा की।
सूत्रों के अनुसार, सिसोदिया गुजरात के राजकोट में नगर निकाय चुनाव प्रचार से लौटे थे और सीधे एयरपोर्ट से केजरीवाल के आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच करीब 30 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा हुई। इस दौरान राज्यसभा में हुई टूट के राजनीतिक प्रभाव और उससे निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया और पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सांसदों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रणनिति पर बात हुई।
दरअसल शुक्रवार (24 अप्रैल)को पार्टी संस्थापक सदस्य और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने घोषणा की कि उन्होंने छह अन्य AAP राज्यसभा सांसदों के साथ पार्टी छोड़ने का फैसला राज्यसभा के सभापति को सूचित कर दिया है।
घटनाक्रम के बाद AAP अब इस मामले को औपचारिक रूप से उठाने की तैयारी कर रही है। पार्टी के अनुसार, मुख्य सचेतक एनडी गुप्ता राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग करेंगे।
इस शिकायत में विशेष रूप से राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक कुमार मित्तल को निशाना बनाए जाने की संभावना है, जिन्हें सार्वजनिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ देखा गया है। AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी संकेत दिया है कि वह सभापति को पत्र लिखकर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे। यह अनुसूची दलबदल से जुड़े मामलों को नियंत्रित करती है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि हालांकि सात सांसदों के पार्टी छोड़ने की बात कही जा रही है, लेकिन फिलहाल तीन सांसदों के सार्वजनिक रूप से BJP के साथ जुड़ने के आधार पर ही तत्काल शिकायत दर्ज की जाएगी।
बता दें की, AAP में यह टूट अचानक नहीं हुई। पिछले कुछ हफ्तों से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा था। राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया, जिसके बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए और BJP के प्रति नरम रुख रखने के आरोपों का सामना किया।
बताया जा रहा है कि हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल समेत कई अन्य नाम भी है जो जल्द ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे।
AAP दलबदल को कानून के तहत चुनौती देने के साथ-साथ अपनी राजनीतिक रणनीति को भी नए सिरे से तैयार कर रही है। पार्टी नेतृत्व इस संकट को संभालने और अपने संगठन को मजबूत बनाए रखने के प्रयासों में जुटा है।
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