आसाम में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक फर्जी पत्र वायरल हो रहा है, जिस पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के फर्जी हस्ताक्षर किए गए है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 19 जनवरी (सोमवार) को जानकारी दी कि उनके आधिकारिक लेटरहेड और कथित हस्ताक्षर का दुरुपयोग करते हुए एक बोगस पत्र प्रसारित किया गया, जिसके संबंध में उन्होंने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है। यह मामला चुनावी माहौल के बीच सामने आया है, जिससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं।
सोनोवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पूरे घटनाक्रम को सार्वजनिक करते हुए कहा, “यह जालसाजी, प्रतिरूपण और आधिकारिक सरकारी पहचान के दुरुपयोग से जुड़ा एक गंभीर आपराधिक अपराध है, जिसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से गलत सूचना फैलाना और एक संवैधानिक प्राधिकारी की छवि को नुकसान पहुंचाना प्रतीत होता है।” उन्होंने आगे बताया कि “कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अनुरोध किया गया है कि वे इस मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच करें और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें।”
केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित पत्र और उसकी सामग्री पूरी तरह से फर्जी है। उन्होंने जनता और मीडिया को आगाह करते हुए कहा, “उक्त पत्र और उसकी सामग्री पूरी तरह से फर्जी और गढ़ी हुई है। जनता और मीडिया को सलाह दी जाती है कि वे इस तरह की धोखाधड़ी वाली सामग्री पर भरोसा न करें और न ही इसे प्रसारित करें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी की पुष्टि करें।”
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह पत्र 15 जनवरी को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को संबोधित बताया जा रहा था। इसमें असम में चुनाव से पहले गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक समस्याओं का दावा किया गया था। पत्र में भ्रष्टाचार, खराब शासन, कानून-व्यवस्था की स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई और सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार से राज्य की जनता असंतुष्ट है।
फर्जी बताए जा रहे इस पत्र में यह दावा भी किया गया कि इन कथित समस्याओं के कारण पार्टी का कैडर आधार कमजोर हो गया है और स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है। पत्र में यहां तक कहा गया कि भारतीय जनता पार्टी पूरे राज्य में केवल 35 से 40 सीटों तक ही सिमट सकती है और चुनाव हारने की कगार पर है।
सोनोवाल के अनुसार, इस पत्र के प्रसार को तुरंत संज्ञान में लिया गया और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस इस पत्र का चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रही थी, हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल, पुलिस ने जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोपों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी पत्र किसने तैयार किया, इसे किस माध्यम से फैलाया गया और इसके पीछे किसका उद्देश्य था। चुनावी माहौल में सामने आए इस विवाद ने असम की राजनीति को और गरमा दिया है।
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