सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया 171 विमान हादसे की जांच में पायलटों को दोषी ठहराने की अटकलों को अव्यवहारिक और जिम्मेदारीहीन करार दिया। यह टिप्पणी उस PIL के जवाब में आई, जिसमें विमान हादसे की स्वतंत्र और कोर्ट-निगरानी वाली जांच की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (22 सितंबर) को कहा, “अगर कल कोई यह कह दे कि पायलट A या B की गलती थी, तो परिवार पर इसका असर पड़ेगा… और अगर अंतिम जांच रिपोर्ट में बाद में दोष नहीं पाया गया तो क्या होगा?” अदालत ने जांच पूरी होने तक गोपनीयता बनाए रखने पर जोर दिया।
PIL में एडवोकेट प्रशांत भूषण ने बताया कि अमेरिकी समाचार पत्र The Wall Street Journal ने प्रारंभिक रिपोर्ट केंद्र को सौंपे जाने से पहले ही एक कहानी प्रकाशित कर दी थी। इसके बाद सरकार ने रिपोर्ट जारी की और मीडिया ने पायलट त्रुटि के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया। भूषण ने कहा कि रिपोर्ट में अनुभवी पायलट को आत्मघाती बताने जैसी बात शामिल थी, जिसमें ईंधन स्विच बदलने का जिक्र था।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्य कांत ने इसे बहुत ही जिम्मेदारीहीन रिपोर्टिंग बताया। कोर्ट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने को कहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि एयरबस या बोइंग जैसे विमान निर्माताओं पर दोषारोपण उचित नहीं होगा, क्योंकि विमान नियमित रूप से मेंटेन और क्लियर किया गया था। साथ ही, एयरलाइन कर्मचारियों पर भी अनावश्यक आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए।
पीआईएल में कहा गया कि विमान हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट में ईंधन कटऑफ स्विच को “रन” से “कटऑफ” में बदलने का जिक्र है, जो पायलट त्रुटि का संकेत देता है। साथ ही यह आरोप लगाया गया कि रिपोर्ट में Digital Flight Data Recorder (DFDR), Cockpit Voice Recorder (CVR) और Electronic Aircraft Fault Recording (EAFR) का पूरा डाटा शामिल नहीं किया गया, जो हादसे की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए आवश्यक है।
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