लोकसभा में बुधवार (10 दिसंबर)को चुनावी सुधारों पर हुई गर्मागर्म बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि “वोट चोरी” का इतिहास नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर से जुड़ा है और सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में दर्ज हो गया था।
शाह ने विपक्ष द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि मतदाता सूची साफ़ करने की प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक और चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है। उन्होंने कहा कि SIR का उद्देश्य मृत मतदाताओं के नाम हटाना, डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ पकड़ना और विदेशी नागरिकों की पहचान करना है, जिसे लेकर प्रदेशों में अक्सर नियमित अभ्यास होते रहे हैं।
अमित शाह ने कहा कि 1952 से 2004 तक विभिन्न कांग्रेस सरकारों ने SIR के कई चरणों को लागू किया, लेकिन किसी दल ने उस समय इसका विरोध नहीं किया। “आज अचानक SIR से परेशानी क्यों? क्या इसलिए कि मतदाता सूची में से अवैध घुसपैठियों के नाम हटेंगे और विपक्ष का वोट बैंक प्रभावित होगा?” उन्होंने पूछा।
राहुल गांधी द्वारा हरियाणा चुनाव में एक घर से 501 वोट डाले जाने के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए शाह ने कहा कि यह फर्जी कथा गढ़ी गई है। उन्होंने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने जिस पते का ज़िक्र किया, वहां एक एकड़ पैतृक भूमि पर कई परिवार रहते हैं। शाह ने कहा, “गलत आरोप लगाकर भ्रम पैदा करना दिल्ली की राजनीति का नया तरीका है।”
चर्चा के दौरान एक समय राहुल गांधी ने शाह के भाषण को बीच में रोककर उन्हें सीधा बहस की चुनौती दी, जिस पर गृह मंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “वह यह तय नहीं कर सकते कि मैं क्या बोलूँगा। पहले धैर्य रखना सीखें।”
सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में जुड़ने के आरोप पर सदन में हंगामा हुआ। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने शाह पर ग़लत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया, जबकि शाह ने कहा कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है और उसका निपटारा वहीं होगा।
गृह मंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 325 और 326 के तहत स्वतंत्र रूप से मतदाता सूची संशोधित करने का अधिकार है और संसद SIR पर बहस नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि NDA सरकार किसी भी चुनावी सुधार पर बहस से पीछे नहीं हटती, लेकिन SIR पर सवाल उठाना चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर हमला है।
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