केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के वेट लॉस की कहानी, बताया आसान लेकीन असरदार उपाय !

"दो घंटे की कसरत, छह घंटे की नींद"

भारतीय राजनीति में जहां बयानबाज़ी, रणनीति और व्यस्तता का बोलबाला है, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बेहद मानवीय और प्रेरणादायक पहलू साझा किया है — अपनी सेहत और फिटनेस की कहानी। विश्व लीवर दिवस (19 अप्रैल) के अवसर पर नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज़ (ILBS) के कार्यक्रम में उन्होंने खुलकर अपनी फिटनेस यात्रा के बारे में बताया।

2020 के मई से अब तक उनके व्यक्तित्व में आए बदलाव को कोई भी नजरअंदाज़ नहीं कर सकता — पहले की तुलना में उनका शरीर अब काफी फुर्तीला और चुस्त दिखता है। लेकिन इसके पीछे कोई लग्ज़री फिटनेस ट्रेनर या महंगे डायट प्लान नहीं, बल्कि सीधी, सादी और सतत दिनचर्या है। शाह ने मंच से बताया, “मैंने मई 2020 से अब तक अपने जीवन में बड़ा बदलाव किया। नींद, पानी, खाना और नियमित व्यायाम ने मुझे बहुत कुछ दिया है। आज मैं बिना किसी ऐलोपैथिक दवा और इंसुलिन के खड़ा हूं।”

उनके मुताबिक, सेहत का मंत्र बहुत सीधा है — हर दिन शरीर को दो घंटे का व्यायाम और दिमाग को छह घंटे की नींद देना। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि स्वास्थ्य कोई लक्ज़री नहीं, बल्कि अनुशासन और सतत अभ्यास का परिणाम है। “यह मेरे काम करने, सोचने और निर्णय लेने की क्षमता में भी सुधार लाया है,” उन्होंने कहा।

अमित शाह का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब अधिकांश लोग या तो फिटनेस को ‘ट्रेंड’ के रूप में लेते हैं या फिर महंगे सप्लिमेंट्स और क्रैश डाइट के पीछे भागते हैं। उनके शब्दों में सादगी है, और उस सादगी में वह दम, जो आज की पीढ़ी को सही दिशा दे सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की — “मैं अनुरोध करता हूं कि वे अपने शरीर के लिए दो घंटे व्यायाम और दिमाग के लिए छह घंटे नींद जरूर दें। यह बहुत उपयोगी होगा। यह मेरा खुद का अनुभव है।”

उनकी यह सादगी और अनुशासनभरी जीवनशैली न सिर्फ आम जन के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती है, बल्कि उन नेताओं के लिए भी एक सीख है जो अक्सर अपने स्वास्थ्य को अंतिम प्राथमिकता पर रखते हैं। शाह की यह स्वीकारोक्ति दिखाती है कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी दवा है — समय, संयम और सच्चा इरादा।

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