इस बैठक में भाग लेने के लिए झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों के अलावा चारों राज्यों के शीर्ष अधिकारी पहुंचने वाले थे। सरकार ने इन्हें राजकीय अतिथि घोषित किया था। बैठक में अंतरराज्यीय समन्वय, केंद्र-राज्यों के बीच परस्पर देनदारियों से संबंधित विषय, उग्रवाद उन्मूलन, परिसंपत्तियों के बंटवारे, नशीले पदार्थों के कारोबार पर नियंत्रण सहित कई मुद्दों पर विमर्श होना था।
उल्लेखनीय है कि संसद से पारित राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत देश को पांच क्षेत्रों उत्तरी, मध्य, पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी में विभाजित किया गया था तथा प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक क्षेत्रीय परिषद का गठन किया गया था। यह एक वैधानिक निकाय है, जिसके पदेन अध्यक्ष देश के गृह मंत्री होते हैं।
क्षेत्रीय परिषद में शामिल किए गए राज्यों के मुख्यमंत्री रोटेशन के आधार पर एक वर्ष की अवधि के लिए उपाध्यक्ष के रूप में दायित्व का निर्वाह करते हैं। वर्तमान में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैं।
केंद्र एवं राज्यों के बीच विचारों एवं अनुभवों का आदान-प्रदान करने तथा सहयोग में इस परिषद की अहम भूमिका होती है। विकास परियोजनाओं के सफल एवं तीव्र निष्पादन के लिए राज्यों के बीच परस्पर सहयोग विकसित करना और सीमा विवाद, अंतरराज्यीय परिवहन से संबंधित मुद्दों का सुलझाने का भी दायित्व इस परिषद पर होता है।
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