सवाल उठने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी से शहबाज शरीफ की सरकार खौफजदा है? प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन के अनुसार, गृह मंत्रालय का यह आदेश 21 अगस्त का है।
आदेश में कहा गया है, “पंजाब गृह विभाग के अनुरोध पर संघीय सरकार, संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, रावलपिंडी में ‘संवेदनशील सुरक्षा कार्यों’ के लिए पाकिस्तान सेना की तीन कंपनियों की तैनाती को मंजूरी देती है।
इसका मकसद किसी भी अवांछित स्थिति से बचना और जिला प्रशासन की जरूरत के अनुसार किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्रवाई करना है। यह तैनाती तत्काल प्रभाव से छह महीने की अवधि के लिए होगी।”पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 245 के तहत सरकार जरूरत पड़ने पर सशस्त्र बलों को नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए तैनात कर सकती है।
भले ही इसे सुरक्षा के मद्देनजर उठाया गया कदम बताया जा रहा है, लेकिन द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट पर गौर करें तो इसका कारण सियासी ज्यादा लगता है। रिपोर्ट में रावलपिंडी के मॉल रोड पर 11 अगस्त को हुई गोलीबारी का जिक्र है। इसके मुताबिक एक “खास राजनीतिक पार्टी” से जुड़े हथियारबंद ने सुरक्षा बलों पर कथित तौर पर गोलीबारी की और एक पेट्रोलिंग अधिकारी को घायल कर दिया था।
हथियारबंद का नाम मुहम्मद हुसैन था जिसे जवाबी कार्रवाई में मार गिराया गया। सुरक्षा सूत्रों का हवाला देते हुए पाकिस्तान टेलीविजन न्यूज (पीटीवी) ने बताया कि कथित हमलावर खैबर जिले का रहने वाला था और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का सक्रिय सदस्य था।
घटना के बाद, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने पीटीआई की आलोचना की और पार्टी पर हिंसा और अशांति फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिंसक विरोध-प्रदर्शन पार्टी के लिए एक पैटर्न बन गया है और दावा किया कि पीटीआई कार्यकर्ता प्रदर्शनों के दौरान हथियार साथ रखते हैं।
वहीं, इस महीने की शुरुआत में पीटीआई ने बड़ा ऐलान किया। कहा कि 27 सितंबर को रावलपिंडी के जुड़वा शहर इस्लामाबाद की ओर एक लॉन्ग मार्च करेगी। खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के सूचना और जनसंपर्क मंत्री शफी जान ने कहा कि यह फैसला पार्टी के सहयोगियों से बातचीत के बाद लिया गया।
लॉन्ग मार्च का यह आह्वान तब किया गया जब पीटीआई ने पार्टी के संस्थापक इमरान खान की जेल की सजा के तीन साल पूरे होने पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के साथ ‘ब्लैक डे’ मनाया गया। पार्टी ने संस्थापक और उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई, संवैधानिक शासन की बहाली, महंगाई से राहत, जिसे उन्होंने ‘जनता का जनादेश’ बताया उसकी बहाली और लोकतंत्र की वापसी की मांग की।
विपक्षी दलों ने शुक्रवार को दोहराया कि वो लॉन्ग मार्च को लेकर गंभीर हैं। साथ ही, उन्होंने इमरान के इलाज से जुड़े सुप्रीम कोर्ट (एसी) के आदेश को लागू करने में सरकार की विफलता के मुद्दे पर कोर्ट जाने का फैसला भी किया।
