इस यूनिट के शुरू होने से भारत में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बीते 11 वर्षों में भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने अभूतपूर्व विकास किया है।
उन्होंने कहा, “2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने मेक इन इंडिया की शुरुआत की थी, तब इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट बेहद सीमित था, लेकिन आज की स्थिति में प्रोडक्शन 6 गुना और एक्सपोर्ट 8 गुना तक बढ़ चुका है।”
अब तक भारत को टेम्पर्ड ग्लास का आयात करना पड़ता था, लेकिन इस नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के जरिए देश में ही बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन संभव होगा। अनुमान है कि इस यूनिट में हर साल ढाई करोड़ टेम्पर्ड ग्लास का निर्माण होगा, जिसका उपयोग लैपटॉप, राउटर, स्मार्टफोन, हार्डवेयर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बड़े स्तर पर किया जाएगा।
अश्विनी वैष्णव ने यह भी बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में भारत अब पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। भारत में विकसित हुआ इलेक्ट्रॉनिक इकोसिस्टम न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
इस मौके पर उन्होंने यह भी जोर दिया कि इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग उद्योग ने अब तक देश में लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। यह रोजगार सीधे तौर पर भी है और अप्रत्यक्ष रूप से भी लाखों लोग इस उद्योग से जुड़े हुए हैं।
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