मुख्यमंत्री हिमंता सरमा ऐलान, मूल निवासियों के लिए शस्त्र लाइसेंस का अलग पोर्टल लाएगी सरकार!

एक विशेष शस्त्र लाइसेंस पोर्टल शुरू करने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री हिमंता सरमा ऐलान, मूल निवासियों के लिए शस्त्र लाइसेंस का अलग पोर्टल लाएगी सरकार!

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य के मूल निवासियों के लिए एक विशेष शस्त्र लाइसेंस पोर्टल शुरू करने की घोषणा की है। इस पोर्टल के जरिए असम के वे मूल भारतीय नागरिक, जो संवेदनशील या दूरस्थ इलाकों में रहते हैं और अपनी जान को खतरा महसूस करते हैं, वे अब शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया कि यह पहल सिर्फ असम के मूल निवासियों के लिए होगी और इसका उद्देश्य उन्हें सुरक्षा का अधिकार देना है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां वे भूमि अतिक्रमण, अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

पांच-स्तरीय जांच प्रक्रिया होगी लागू:

सरकार द्वारा प्रस्तावित पोर्टल में कड़ी जांच और कानूनी प्रक्रिया को शामिल किया जाएगा, जिससे केवल वास्तविक और योग्य आवेदकों को ही लाइसेंस जारी किया जाए। प्रक्रिया के पांच प्रमुख चरण होंगे:

  1. सुरक्षा मूल्यांकन (Security Assessment)
  2. सत्यापन और वैधानिक जांच (Verification and Vetting)
  3. वर्तमान शस्त्र कानूनों के अनुपालन की समीक्षा (Compliance with Existing Laws)
  4. लाइसेंस का गैर-हस्तांतरण और समय-समय पर पुनरीक्षण (Non-transferability and Periodic Review)
  5. नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग (Monitoring and Reporting)

पोर्टल के लिए पंजीकरण उन्हीं नागरिकों के लिए होगा जो असम के मूल निवासी हैं और जिनका क्षेत्र जिला प्रशासन द्वारा संवेदनशील या कमजोर घोषित किया गया है। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा एजेंसियों द्वारा भी क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

मुख्यमंत्री सरमा की यह घोषणा लगातार मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा, जंगलों और जनजातीय क्षेत्रों में अतिक्रमण पर रोक, और अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त रुख सरकार की नीति के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य के उन लोगों के आत्म-सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा है, जो पीढ़ियों से अपने क्षेत्र में रहते आए हैं।

सरमा ने यह भी कहा कि “यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने मूल निवासियों को वह शक्ति और आत्मविश्वास दें जिसकी उन्हें ज़रूरत है। जब उन्हें लगे कि उनकी संस्कृति, ज़मीन और जान को खतरा है, तो सरकार को उनके साथ खड़ा होना चाहिए।”

यह पहल असम में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं और सामाजिक असंतुलन को ध्यान में रखते हुए लाई जा रही है। राज्य सरकार का यह कदम न केवल मूल असमियों को सशक्त करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि शस्त्र का दुरुपयोग न हो और हर लाइसेंस कानूनी प्रक्रिया के तहत पारदर्शी तरीके से जारी किया जाए।

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