बलूचिस्तान को लेकर एक गंभीर भू-राजनीतिक चेतावनी सामने आई है। बलोच प्रतिनिधि मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखकर आगाह किया है कि आने वाले कुछ महीनों में चीन बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर सकता है। उन्होंने इसे न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि भारत के लिए भी गंभीर और आसन्न खतरा करार दिया है।
1 जनवरी 2026 को लिखे गए इस पत्र में मीर यार बलोच ने स्वयं को “रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान” का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि यदि बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो चीन के लिए वहां सैन्य हस्तक्षेप का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए लिखा, “यदि बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और उन्हें पुराने पैटर्न के अनुसार अनदेखा किया जाता रहा, तो यह संभव है कि चीन आने वाले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सैन्य सेनाएं तैनात कर दे।”
पत्र में आगे कहा गया,“60 मिलियन बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तानी धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती होगी।”
मीर यार बलोच ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनके अनुसार पाकिस्तान और चीन के बीच रणनीतिक गठजोड़ CPEC के अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जिससे हालात और अधिक खतरनाक हो गए हैं। उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के बीच ठोस और पारस्परिक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि दोनों ही देशों को जिन खतरों का सामना करना पड़ रहा है, वे वास्तविक और निकट भविष्य में सामने आने वाले हैं।
पत्र में बलोच नेता ने भारत और बलूचिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) जैसे पवित्र स्थलों का हवाला देते हुए इन्हें साझा विरासत का प्रतीक बताया।
इसके अलावा, मीर यार बलोच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा की गई कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की भी सराहना की। उन्होंने लिखा कि यह अभियान पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवाद के ठिकानों के खिलाफ था और पहलगाम आतंकी हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के प्रति भारत की अडिग प्रतिबद्धता और असाधारण साहस को दर्शाता है।
पत्र के अंत में मीर यार बलोच ने भारत और बलूचिस्तान के बीच भविष्य में और मजबूत सहयोग की उम्मीद जताई। उन्होंने इसे हमारे दो महान राष्ट्रों के बीच साझेदारी का स्वाभाविक विस्तार बताते हुए कहा कि बदलते क्षेत्रीय हालात में यह सहयोग दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
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