मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), पश्चिम बंगाल, मनोज कुमार अग्रवाल ने सुनवाई की प्रक्रिया के लिए सात दिन का अतिरिक्त समय मांगा है। हालांकि, कोलकाता स्थित सीईओ कार्यालय को अब तक नई दिल्ली में चुनाव आयोग (ईसीआई) मुख्यालय से इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला है।
सीईओ कार्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, भ्रम की स्थिति दो वजहों से बनी है। पहली, अगर समय-सीमा बढ़ाई जाती है तो नई अंतिम तारीख क्या होगी? दूसरी, यह विस्तार केवल उन्हीं 15 विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित रहेगा, जहां सुनवाई पूरी नहीं हो पाई है या फिर पूरे राज्य के लिए समय-सीमा बढ़ाई जाएगी?
सूत्रों ने बताया कि अगर चुनाव आयोग पूरे राज्य के लिए समय-सीमा बढ़ाने का फैसला करता है, तो 14 फरवरी को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन में भी उसी अनुपात में देरी होगी।
जिन 15 विधानसभा क्षेत्रों में सुनवाई अब तक पूरी नहीं हो पाई है, वे मुख्य रूप से तीन निर्वाचन जिलों में आते हैं। इनमें अल्पसंख्यक बहुल मालदा, तटीय और सीमावर्ती दक्षिण 24 परगना और कोलकाता उत्तर शामिल हैं।
इस बीच, एक बड़ी जानकारी सामने आई है कि 4 लाख से अधिक अतिरिक्त मतदाताओं की पहचान ऐसे लोगों के रूप में की गई है, जिनका नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। ये वे मतदाता हैं, जो दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद उपस्थित नहीं हुए।
इन 4 लाख संभावित रूप से हटाए जाने वाले मतदाताओं में करीब 50 हजार ‘अनमैप्ड’ हैं और लगभग 3 लाख 50 हजार ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाले मामले हैं। अनमैप्ड मतदाता वे हैं, जो 2002 की मतदाता सूची से अपना संबंध साबित नहीं कर पाए, न खुद के माध्यम से और न ही वंश (प्रोजेनी) मैपिंग के जरिए। वहीं, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले मामलों में वंश मैपिंग के दौरान पारिवारिक विवरण में असामान्य गड़बड़ियां पाई गईं।
पिछले साल दिसंबर में जब ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई थी, तब 58,20,899 मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। इन्हें मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाता के रूप में चिह्नित किया गया था। 14 फरवरी को अंतिम सूची जारी होने के बाद कुल कितने नाम हटे, यह स्पष्ट हो जाएगा।
अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद चुनाव आयोग का पूर्ण पीठ पश्चिम बंगाल का दौरा कर हालात का आकलन करेगा। इसके बाद विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा।
इस बीच, एसआईआर से जुड़ा एक अहम मामला सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। संभावना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 4 फरवरी की तरह एक बार फिर इस मुद्दे पर अदालत के सामने अपना पक्ष रखेंगी।
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