बिहार में होंगे एक से अधिक डिप्टी सीएम, मुस्लिम समुदाय से भी प्रतिनिधित्व की पुष्टि: तेजस्वी यादव

एनडीए ने विपक्ष पर मुस्लिम समुदाय को केवल “वोट बैंक” की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

बिहार में होंगे एक से अधिक डिप्टी सीएम, मुस्लिम समुदाय से भी प्रतिनिधित्व की पुष्टि: तेजस्वी यादव

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बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन ने सत्ता में आने पर सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर बड़ा ऐलान किया है। राजद नेता और मुख्यमंत्री पद के विपक्षी उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने शनिवार को कहा कि महागठबंधन की सरकार में एक से अधिक उपमुख्यमंत्री होंगे, जिनमें एक मुस्लिम समुदाय से भी होगा।

हाल ही में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम पद का संभावित चेहरा बनाए जाने के बाद, मुस्लिम समुदाय से भी उपमुख्यमंत्री की मांग तेज हो गई थी। कांग्रेस समेत महागठबंधन के अन्य दलों ने भी इस मांग का समर्थन किया है। बिहार में मुस्लिम आबादी लगभग 17 प्रतिशत है।

इंडिया टुडे के साथ विशेष साक्षात्कार में जब पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने तेजस्वी यादव से पूछा कि क्या महागठबंधन सरकार में मुस्लिम समुदाय से उपमुख्यमंत्री होगा, तो उन्होंने साफ कहा, “हाँ, निश्चित रूप से।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या कई डिप्टी सीएम होंगे, एक दलित समुदाय से और एक मुस्लिम समुदाय से तो तेजस्वी ने कहा कि इसकी घोषणा पहले ही की जा चुकी है। “जिस दिन यह घोषणा हुई थी, अशोक गहलोत जी ने भी कहा था कि अगर मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा तो अन्य समुदायों से भी प्रतिनिधि होंगे। सभी वर्गों की चिंताओं को दूर किया जाएगा,” तेजस्वी ने कहा।

उन्होंने आगे कहा कि राजद और महागठबंधन इस बार “सभी को साथ लेकर चलने और सबको समान अवसर देने” की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि पार्टी की पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) छवि से आगे बढ़ा जा सके।

तेजस्वी ने दावा किया कि भाजपा भले ही प्रतिनिधित्व की बात करती है, लेकिन वास्तव में महागठबंधन ने टिकट वितरण में समावेशिता दिखाई है। “इस बार अगर किसी ने अल्पसंख्यकों, पिछड़ों, अति पिछड़ों और यहां तक कि सवर्णों को भी उचित टिकट दिए हैं, तो वह राजद और महागठबंधन है,” उन्होंने कहा।

सत्तारूढ़ एनडीए ने विपक्ष पर मुस्लिम समुदाय को केवल “वोट बैंक” की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विपक्ष चुनाव आते ही मुसलमानों को अपने पक्ष में दिखाने का नाटक करता है, लेकिन वास्तविक प्रतिनिधित्व देने में असफल रहा है। “एनडीए सरकार में बिना किसी भेदभाव के अल्पसंख्यक समुदाय को हर क्षेत्र में प्रतिनिधित्व मिल रहा है। पिछली सरकारें सिर्फ वोट के लिए उन्हें इस्तेमाल करती थीं,” नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा।

इस पर तेजस्वी यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा और उसके सहयोगियों की यह “अचानक मुस्लिमों के प्रति चिंता” पाखंडपूर्ण (hypocritical) है।उन्होंने कहा,“जो गठबंधन पहले अल्पसंख्यकों के खिलाफ बयानबाज़ी करता रहा है, उसका अब प्रतिनिधित्व की बात करना दोहरा चरित्र दिखाता है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घोषणा न केवल महागठबंधन की समावेशी रणनीति को रेखांकित करती है, बल्कि बिहार की सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यक और दलित समुदायों में भरोसा बढ़ाने का प्रयास भी है।

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