बिहार में 99.86% वोटरों का कवरेज, 64 लाख नाम हटने तय
चुनाव आयोग द्वारा बिहार में कराए जा रहे विशेष पुनरीक्षण में अब तक 7.23 करोड़ यानी 99.86% मतदाताओं का कवरेज हो चुका है। 7.89 करोड़ मतदाताओं वाली पुरानी सूची से लगभग 64 लाख नाम हटाए जाने की संभावना है। ये वे नाम हैं, जिनका फॉर्म जमा नहीं हुआ या जो अयोग्य पाए गए हैं। यदि किसी मतदाता ने अब तक फॉर्म नहीं दिया है, तो वह भी सूची से बाहर किया जा सकता है।
1 सितंबर तक फॉर्म भरने का अवसर, वास्तविक वोटर का नाम जोड़ा जाएगा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आश्वासन दिया है कि यदि कोई वास्तविक वोटर छूट गया हो तो वह 1 सितंबर तक एनुमरेशन फॉर्म भरकर सूची में अपना नाम दर्ज करा सकता है। उन्होंने कहा कि आयोग की यह प्रक्रिया पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।
क्या है Special Intensive Revision (SIR)?
SIR मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने की एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत मृतक, दो जगह पंजीकृत, स्थायी रूप से पलायन कर चुके, फर्जी या विदेशी मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाते हैं। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यह प्रक्रिया संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 के तहत की जा रही है।
विपक्ष का आरोप – नागरिकता की आड़ में हो रहा दमन
इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग इस बहाने नागरिकता की जांच कर रहा है और लोगों से वोटिंग अधिकार छीना जा सकता है। विपक्ष ने इसे ‘पीछे के दरवाजे से नागरिकता पर हमले’ के रूप में देखा है।
चुनाव आयोग का जवाब – संविधान सम्मत प्रक्रिया, मताधिकार से वंचित नहीं होगा कोई
आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता समाप्त होने जैसा नहीं है। आयोग के अनुसार, उसके पास यह अधिकार है कि वह मतदाता की योग्यता जांचने के लिए आवश्यक दस्तावेज मांग सके ताकि चुनाव निष्पक्ष और भरोसेमंद रह सके।
पृष्ठभूमि और आगे की प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने 24 जून को ही इस प्रक्रिया के आदेश जारी कर दिए थे और बिहार में 25 जून से 26 जुलाई तक यह कार्य चलाया जा रहा है। अब यह कवायद अन्य राज्यों में भी शुरू की जाएगी, जिससे मतदाता सूची की अखंडता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
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