बिहार की नई सरकार ने गुरुवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ली, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार पदभार संभाला। इसके साथ ही एनडीए के दो वरिष्ठ भाजपा नेता सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जिससे गठबंधन की सत्ता संरचना और स्पष्ट हो गई।
समारोह में भाजपा नेता विजय कुमार सिन्हा ने अपने दूसरे कार्यकाल के लिए उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि पार्टी के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी भी उपमुख्यमंत्री बने। दोनों नेताओं की नियुक्ति यह संकेत देती है कि भाजपा इस बार गठबंधन की सरकार में अधिक सक्रिय भूमिका और मजबूत हिस्सेदारी चाहती है। सम्राट चौधरी लंबे समय से संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करते आए हैं, अब प्रशासनिक स्तर पर भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कई अन्य शीर्ष नेताओं की उपस्थिति ने इस राजनीतिक आयोजन को और भी भव्य और महत्वपूर्ण बना दिया। पीएम मोदी की मौजूदगी ने यह भी दर्शाया कि केंद्र सरकार और बिहार की नई सरकार के बीच तालमेल मजबूत है।
बिहार में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में एनडीए को मिली जबरदस्त जीत के बाद यह शपथ ग्रहण समारोह सत्ता के नए समीकरणों और राजनीतिक संदेशों का प्रतीक बना। 74 वर्षीय नीतीश कुमार ने अपने दो डिप्टी के साथ शपथ लेकर एक बार फिर प्रशासनिक नेतृत्व का दावा मजबूत किया।
नई सरकार के गठन के साथ ही बिहार कैबिनेट का विस्तार भी चर्चा में है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मंत्रिमंडल में 16 मंत्री भाजपा से और 14 मंत्री जदयू से शामिल किए जाने की संभावना है, जिनमें 5-6 नए चेहरे भी हो सकते हैं। यह बदलाव एनडीए की सरकार को एक नया स्वरूप देने और प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
गांधी मैदान में आयोजित इस समारोह ने न केवल बिहार की राजनीति को नई दिशा दी है, बल्कि एनडीए की एकजुटता और शक्ति का भी प्रदर्शन किया है। आने वाले दिनों में कैबिनेट विस्तार, पदों का बंटवारा और सरकार की प्राथमिकताएँ क्या होंगी, इस पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।
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