बिहार में चुनाव आयोग की विशेष मतदाता सूची सुधार (SIR) प्रक्रिया के तहत आपत्तियां और दावे दर्ज कराने का अभियान जारी है। आयोग के अनुसार, 12 अगस्त सुबह 10 बजे तक 13,970 निर्वाचकों ने सीधे तौर पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराई हैं। दिलचस्प यह है कि जिन राजनीतिक दलों ने हाल ही में बिहार से लेकर दिल्ली तक मतदाता सूची को लेकर सियासी बयानबाज़ी की थी, उन्होंने अब तक चुनाव आयोग के समक्ष कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।
चुनाव आयोग के दैनिक बुलेटिन के मुताबिक, 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के मतदाताओं से फॉर्म-6 और घोषणा पत्र के माध्यम से कुल 63,591 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। इनमें से निर्वाचक नामावली से जुड़ी 13,970 आपत्तियों और दावों में से 341 मामलों का निस्तारण सात दिन के भीतर कर दिया गया है।
आयोग ने बताया कि पूरे बिहार में 12 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के 1,60,813 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) हैं, लेकिन इनमें से किसी ने भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए कोई आपत्ति दर्ज नहीं की है। इन बीएलए में कांग्रेस के 17,549 और राजद के 47,506 एजेंट भी शामिल हैं।
नियमों के मुताबिक, दावों और आपत्तियों का निस्तारण संबंधित ईआरओ या एईआरओ द्वारा पात्रता दस्तावेजों की जांच के बाद ही किया जाता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी नाम को बिना जांच और ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ पारित किए सूची से नहीं हटाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि 1 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद से यह आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। फिलहाल विपक्ष की खामोशी इस प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल बनकर उभर रही है।
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