बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए मतदाता पुनरीक्षण (वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन) अभियान को लेकर सियासी बवाल गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर निशाना साधा है। अब राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भी इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पटना में पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने कहा, “वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन बड़ा मुद्दा है। पता नहीं इनकी मंशा क्या है?” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार और चुनाव आयोग लोकतंत्र को कमजोर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। गहलोत ने कहा कि यह निर्णय विपक्ष को भरोसे में लिए बिना किया गया है, जिससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
उन्होंने कहा, “हम समझते हैं कि वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन का फैसला कंफ्यूजन बढ़ा रहा है। चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य क्या है।” उन्होंने यह भी कहा कि आयोग की जिम्मेदारी होती है कि पक्ष और विपक्ष, दोनों को साथ लेकर फैसला ले, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
गहलोत ने यह भी बताया कि दिल्ली में काम करने वाले बिहार के कई लोग उनसे मिलकर इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने कहा, “लोग पूछते हैं कि हम अपने मां-बाप का बर्थ सर्टिफिकेट कहां से लाएं? इस तरह की परेशानी और उलझनें लोगों को डरा रही हैं।”
उन्होंने चुनाव आयोग को सुझाव देते हुए कहा कि इस भ्रम को जल्द दूर किया जाए ताकि जनता में विश्वास बना रहे। गौरतलब है कि बिहार में 25 जून से 26 जुलाई तक घर-घर जाकर मतदाता सूची के सत्यापन का काम किया जा रहा है। जहां सत्तारूढ़ भाजपा इसे पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसे साजिश और असहमति की प्रक्रिया कह रहे हैं।
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