महाराष्ट्र में कचरे से ऊर्जा बनाने की पहल; CM फडणवीस का बड़ा निर्देश

कचरे से बनेगी CBG गैस

महाराष्ट्र में कचरे से ऊर्जा बनाने की पहल; CM फडणवीस का बड़ा निर्देश

राज्य के शहरों को वेस्ट-फ्री बनाने के अलावा, कचरे से कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रोजेक्ट्स लगाने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई जानी चाहिए। जहां भी हो सके, राज्य की CBG पॉलिसी के अनुसार प्रोजेक्ट्स लगाए जाने चाहिए, ऐसा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में वर्षा के घर पर वेस्ट-फ्री शहरों और कम्प्रेस्ड बायोगैस प्रोजेक्ट्स को लेकर एक मीटिंग हुई। इस मीटिंग में राज्य में प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स का रिव्यू किया गया। इस मौके पर राज्य मंत्री माधुरी मिसाल, मुंबई म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े, अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के. एच. गोविंदराज और अन्य लोग मौजूद थे।

केवा ग्रीन की ओर से एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वृंदा ठाकुर, मैनेजिंग डायरेक्टर केदार वाजे और डायरेक्टर नंदन वाजे ने कचरे से बायोगैस प्रोडक्शन के लिए नागपुर में लागू किए गए प्रोजेक्ट को प्रेजेंट किया। उन्होंने राज्य के दूसरे शहरों में भी ऐसे प्रोजेक्ट्स लगाने की जानकारी दी।

कचरे की मात्रा और जगह को ध्यान में रखकर प्लानिंग

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि CBG प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग करते समय, शहर में कचरे की मात्रा, उपलब्ध जगह, टेक्नोलॉजी की सूटेबिलिटी और गैस पाइपलाइन की दूरी पर विचार करना ज़रूरी है। प्रोजेक्ट्स को लागू करने का प्रोसेस इस सेक्टर की कंपनियों, तेल कंपनियों और लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट बॉडीज़ की भागीदारी से तय किया जाना चाहिए। कचरे से बायोगैस प्रोडक्शन प्रोजेक्ट्स लगाने से नगर पालिकाओं को कचरा इकट्ठा करने और ट्रांसपोर्टेशन पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, उन्होंने कहा कि इससे कचरे के साइंटिफिक मैनेजमेंट और शहरों को कचरा-मुक्त बनाने के लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन और पुणे इलाके में प्रोजेक्ट्स पर विचार

क्योंकि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में कचरे की मात्रा ज़्यादा है, इसलिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, वसई-विरार, मीरा-भायंदर और कल्याण-डोंबिवली के इलाकों में CBG प्रोजेक्ट्स लगाने की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए। पुणे के हिंजेवाड़ी और चाकन इलाकों में ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए सही जगहें तय करने पर भी विचार करने का सुझाव दिया गया। यह भी सुझाव दिया गया कि प्रोजेक्ट लगाते समय कचरे के साइंटिफिक मैनेजमेंट, मौजूद टेक्नोलॉजी का असरदार इस्तेमाल और ज़रूरी जगह की प्लानिंग को प्राथमिकता दी जाए।

क्लस्टर मॉडल के ज़रिए कचरा मैनेजमेंट

मीटिंग में नागपुर में प्रोजेक्ट के अनुभव, क्लस्टर मोड में प्रोजेक्ट लगाने, कचरे को अलग करने, ज़मीन की उपलब्धता, गैस पाइपलाइन से कनेक्शन और अलग-अलग टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर चर्चा हुई।

यह भी सुझाव दिया गया कि म्युनिसिपल एरिया में कचरे को प्रोसेस करने के लिए आस-पास के शहरों को शामिल करते हुए क्लस्टर मॉडल बनाने के ऑप्शन पर भी विचार किया जाए। अगर शहरों में कचरे का प्राइमरी क्लासिफिकेशन किया जाए और आगे की प्रोसेसिंग शहर के बाहर किसी सही जगह पर की जाए, तो शहर पर दबाव कम किया जा सकता है। साथ ही, गैस पाइपलाइन के पास प्रोजेक्ट लगाने से बनने वाली गैस के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।

मीटिंग में स्वच्छ महाराष्ट्र मिशन के डायरेक्टर नवनाथ वाथ, केवा ग्रीन के प्रतिनिधि, BPCL के चीफ जनरल मैनेजर इंद्रजीत सिंह, जनरल मैनेजर संतोष वार्ष्णे और WTT के तजर्ड वान बर्ग शामिल हुए। राज्य की अलग-अलग म्युनिसिपैलिटी के कमिश्नरों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए मीटिंग में हिस्सा लिया।

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