मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारा मकसद केवल हंगामा खड़ा करना नहीं, बल्कि दिल्ली की सूरत बदलना है। नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में दिल्ली के सांसद, विधायक, पार्षद और अधिकारी एकजुट होकर विकास के लिए काम कर रहे हैं।”
उन्होंने पिछले 27 सालों के ‘दुख के वनवास’ को समाप्त करने का संकल्प दोहराया। गुप्ता ने बताया कि सरकार के गठन के 60 दिनों में ही टैंकर माफिया को खत्म करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए प्रत्येक टैंकर में जीपीएस सिस्टम और कमांड सेंटर की व्यवस्था की गई है, ताकि पानी की आपूर्ति की निगरानी हो सके।
उन्होंने कहा, “हर टैंकर की निगरानी जनता स्वयं करेगी। हमारी सरकार पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम कर रही है। न पानी की लीकेज होगी, न भ्रष्टाचार की।”
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि टैंकर अस्थायी समाधान हैं। सरकार का मुख्य लक्ष्य योजनाबद्ध तरीके से टाउन प्लानिंग के तहत हर घर तक नल से जल पहुंचाना है। इसके लिए जल विभाग के लिए 9,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है|
गुप्ता ने कहा, “फंड की कमी से कोई भी काम रुकेगा नहीं। हम डिजिटल दिल्ली के सपने को हर विभाग में लागू करेंगे।” कार्यक्रम में मौजूद सांसदों, मंत्रियों और अधिकारियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए दिल्ली के विकास के लिए मिलकर काम करने का वादा किया।
मुख्यमंत्री ने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सांसद और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी थी, जिसके कारण श्रेय लेने की होड़ रहती थी। लेकिन अब सभी एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल दिल्लीवासियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। जीपीएस युक्त टैंकरों और पारदर्शी व्यवस्था के साथ सरकार जल संकट को खत्म करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।
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