यह आंदोलन केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के खिलाफ शुरू किया जा रहा है, जिसे कांग्रेस ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका पर सीधा हमला बताया है।
केसी वेणुगोपाल ने पत्र के जरिए कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया एक अधिकार-आधारित कानून है। यह कानून ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की मांग करने का कानूनी अधिकार देता है।
कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका की रीढ़ रहा है, जिससे हर साल 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार मिलता है। इससे मजबूरी में होने वाला पलायन घटा है, ग्रामीण मजदूरी बढ़ी है और गांवों में टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण हुआ है।
कांग्रेस ने नए विकसित भारत जी राम जी अधिनियम पर आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि यह नया कानून मनरेगा की मूल भावना से पूरी तरह अलग है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के मूल्यों को कमजोर करने जैसा है।
इन्हीं कारणों से कांग्रेस कार्यसमिति ने 27 दिसंबर को हुई बैठक में सर्वसम्मति से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ नाम से राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का फैसला किया। इस आंदोलन के तहत चरणबद्ध कार्यक्रम तय किए गए हैं। कार्यक्रम के अनुसार, पहले पीसीसी मुख्यालयों में बैठकें होंगी, जिनमें नए कानून के असर पर चर्चा की जाएगी और जिला-वार जिम्मेदारियां तय होंगी।
सभी जिलों में 10 जनवरी को डीसीसी कार्यालयों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों या प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध होगा, जिसमें पार्टी नेता, निर्वाचित प्रतिनिधि और मनरेगा श्रमिक शामिल होंगे।
पंचायत स्तर पर 12 से 29 जनवरी तक चौपालें, जनसंपर्क कार्यक्रम, नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण किए जाएंगे। वार्ड और ब्लॉक स्तर पर 30 जनवरी को शांतिपूर्ण धरने होंगे।



