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Tuesday, February 17, 2026
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कांग्रेस का अंतर्गत विवाद चौराहे पर; शशि थरूर अब हमारे नहीं रहे

उन्हें किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा।

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कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री के. मुरलीधरन ने रविवार(21 जुलाई) को पार्टी सांसद और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य शशि थरूर पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “थरूर अब हमारे नहीं रहे” और जब तक वे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर ली गई स्थिति नहीं बदलते, उन्हें तिरुवनंतपुरम में किसी भी पार्टी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाएगा।

मुरलीधरन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “जब तक वह (थरूर) अपना रुख नहीं बदलते, उन्हें किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा। जब वह हमारे साथ हैं ही नहीं, तो उनके बहिष्कार का सवाल ही नहीं उठता।” उन्होंने आगे कहा कि थरूर के खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी है, इसका फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

यह बयान ऐसे समय पर आया है जब कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन, आगामी मानसून सत्र में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर घेरने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, थरूर के हालिया बयानों ने पार्टी के भीतर विवाद और बढ़ा दिया है।

हाल ही में थरूर ने एक कार्यक्रम में कहा था कि “देश को हमेशा पहले रखा जाना चाहिए। राजनीतिक दलों का उद्देश्य देश को बेहतर बनाना होना चाहिए।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई लोग उन्हें ‘राष्ट्र पहले’ की नीति अपनाने पर आलोचना कर रहे हैं — खासकर जब वह हाल के आतंकी घटनाओं और सीमाओं पर स्थिति को लेकर केंद्र और सशस्त्र बलों का समर्थन कर रहे हैं।

थरूर ने कोच्चि में एक कार्यक्रम में कहा था, “मैं अपने रुख पर कायम रहूंगा, क्योंकि मुझे विश्वास है कि यह देश के हित में है।” उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई नेता राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विभिन्न दलों के साथ सहयोग की बात करता है, तो उसे अपनी ही पार्टी में अविश्वास का सामना करना पड़ता है, जो एक गंभीर समस्या बन जाती है। मुरलीधरन पहले भी थरूर की आलोचना कर चुके हैं, जब उन्होंने एक सर्वे साझा किया था जिसमें उन्हें UDF का मुख्यमंत्री चेहरा बताया गया था। तब मुरलीधरन ने कहा था, “उन्हें पहले तय करना चाहिए कि वे किस पार्टी में हैं।”

थरूर द्वारा इंदिरा गांधी के आपातकाल के फैसलों की आलोचना करते हुए लिखे गए एक लेख पर भी मुरलीधरन ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि अगर थरूर कांग्रेस में सीमित महसूस करते हैं, तो उन्हें अपना राजनीतिक रास्ता स्पष्ट करना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि शशि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद अब निजी बयानबाजी तक पहुंच चुके हैं। यह विवाद पार्टी के लिए आगामी चुनावों और संसद सत्र के दौरान बड़ा सिरदर्द बन सकता है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि कांग्रेस हाईकमान इस विवाद को कैसे संभालता है — और क्या थरूर को पार्टी में बनाए रखता है या उन्हें किनारे कर दिया जाता है।

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