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जमीन से कट चुकी है कांग्रेस, बीजेपी अब भी जनता के बीच: फतेहजंग सिंह बाजवा!

भारत सभी धर्मों, सभी समुदायों का देश है। यहां हर नागरिक को बराबरी का अधिकार है। देश की तरक्की में सभी का योगदान है|

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पंजाब बीजेपी के उपाध्यक्ष फतेहजंग सिंह बाजवा ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कई मुद्दों पर अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के बयान से लेकर कांग्रेस की जमीनी पकड़, राहुल गांधी की राजनीति, बांग्लादेश से जुड़े विवाद, मोहन भागवत के बयान और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आरोपों तक पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी।

फतेहजंग सिंह बाजवा ने कहा कि टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस को आईना दिखाने की कोशिश की है और यह बात किसी से छुपी नहीं है। आज की तारीख में कांग्रेस पूरी तरह से जमीनी स्तर पर लोगों से कट चुकी है। कांग्रेस नेता सिर्फ बयानबाजी तक सीमित हैं, जबकि जनता के बीच उनका कोई वास्तविक जुड़ाव नहीं रह गया। इसके उलट बीजेपी लगातार लोगों के बीच रहती है और उनके मुद्दों पर काम करती है।

उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे वहां माहौल जैसा भी हो, बीजेपी के कार्यकर्ता आज भी वहां मौजूद हैं, चुनाव लड़ रहे हैं और चुनाव की रणनीति तैयार कर रहे हैं। बाजवा ने कहा कि यही फर्क है बीजेपी और कांग्रेस में। कांग्रेस सिर्फ भाषण देती है, जबकि बीजेपी जमीन पर उतरकर काम करती है। उन्होंने हरियाणा, बिहार और अन्य राज्यों के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि इन जगहों पर कांग्रेस का जनता से जो बेसिक कनेक्शन था, वह अब पूरी तरह टूट चुका है।

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए फतेहजंग सिंह बाजवा ने कहा कि राजनीति भी एक तरह का मुकाबला होती है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पूरी टीम है, जिनका विजन, नेतृत्व और दिशा स्पष्ट है।

दूसरी तरफ राहुल गांधी और उनकी टीम है, जिन्हें खुद नहीं पता कि वे क्या कहना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को शायद पीएम मोदी का मुकाबला करने के लिए एक नहीं, कई जन्म लेने पड़ेंगे। जनता दोनों के बीच का अंतर साफ देख रही है।

बीजेपी नेता संगीत सोम द्वारा केकेआर की ओर से एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को खरीदने पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बाजवा ने कहा कि जब किसी देश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं को चुन-चुनकर मारा जा रहा हो, तो ऐसे देश से रिश्तों पर सवाल उठना लाजमी है। ऐसे हालात में सिर्फ खेल की बात करना संवेदनहीनता होगी। जब हमारे हिंदू भाइयों की हत्या हो रही है, तो क्या हमें यह सवाल नहीं उठाना चाहिए कि उनकी टीम भारत क्यों आए और हम उनके साथ मैच क्यों खेलें?

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार बंद नहीं होता, तब तक भारत को उनके साथ न सिर्फ मैच खेलने से बल्कि रिश्ते रखने से भी परहेज करना चाहिए। बाजवा ने कहा कि भारत हमेशा जुल्म के खिलाफ खड़ा रहा है और आगे भी खड़ा रहेगा। जब एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा हो, तो चुप रहना भी अपराध है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के भारत को हिंदुओं का देश बताने वाले बयान पर बाजवा ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत को हिंदुओं का देश कहने का मतलब यह नहीं है कि यहां अल्पसंख्यकों का सम्मान नहीं है।

भारत सभी धर्मों, सभी समुदायों का देश है। यहां हर नागरिक को बराबरी का अधिकार है। देश की तरक्की में सभी का योगदान है और इसी वजह से आज भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। भारत हिंदुओं का भी है और अल्पसंख्यकों का भी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिए गए 2025 में बीजेपी की लूट वाले बयान पर बाजवा ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किस लूट की बात की जा रही है? क्या वोटों की लूट, पैसों की लूट या जनता की लूट? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस तरह के आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। अगर कांग्रेस खुद को एक जिम्मेदार विपक्ष के तौर पर देखती है, तो उसे पहले अपनी संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करना चाहिए और जनता के बीच जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्कैम और घोटालों की बात करें तो देश ने 2जी घोटाला, कोयला घोटाला जैसे बड़े-बड़े स्कैम कांग्रेस शासन में ही देखे हैं। जनता सब कुछ भूली नहीं है और न ही जनता की सोच इतनी छोटी है कि वह बिना सबूत के आरोपों पर भरोसा कर ले।

वोट चोरी जैसे आरोपों पर बाजवा ने कहा कि अगर कांग्रेस के पास कोई सबूत है तो सामने लाए। अगर सच में वोट चोरी हुई है और वह साबित हो जाती है, तो जनता कभी भी दोषी पार्टी को माफ नहीं करेगी। लेकिन सिर्फ बातों से सच्चाई नहीं बनती। वहीं, राहुल गांधी की तुलना भगवान श्रीराम से किए जाने वाले बयान पर बाजवा ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की सोच पर उन्हें तरस आता है।

उन्होंने कहा कि किसी इंसान की तुलना भगवान से करना न सिर्फ गलत है बल्कि यह बेहद घटिया किस्म की चापलूसी है। भगवान का दर्जा किसी मनुष्य से कहीं ऊपर होता है और इस तरह की तुलना करना पूरी तरह अनुचित है। बाजवा ने ऐसे बयानों की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि राजनीति में मर्यादा और सोच का स्तर बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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