कर्नाटक के पूर्व सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “आपने राज्यपाल को भेजा गया पत्र और उनके कार्यालय की प्रतिक्रिया देखी होगी। उस पत्र में ‘ड्रॉप्ड’ शब्द का उल्लेख है। यह हाईकमान का फैसला था, इसलिए मुख्यमंत्री ने वह पत्र राज्यपाल को भेजा और राज्यपाल ने उसे स्वीकार किया। यह पार्टी का निर्णय है, इसलिए इस वक्त मैं हाईकमान पर सवाल नहीं उठाना चाहता, ताकि उन्हें कोई असुविधा न हो।”
उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने का फैसला कांग्रेस हाईकमान का था और इसके पीछे एक साजिश रची गई है ऐसा उनका मानना है। हालांकि, उन्होंने फिलहाल इसका खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा कि सही समय आने पर वे पूरी कहानी सामने रखेंगे। उन्होंने कहा, “चाहे आप इसे इस्तीफा कहें, ड्रॉप करना कहें या बर्खास्तगी, इसके पीछे एक साजिश है। किसने साजिश की, कौन लोग इसके पीछे हैं, किन नेताओं ने इसमें भूमिका निभाई और यह सब कैसे हुआ — मैं सही समय आने पर सब बताऊंगा।”
राजन्ना की बर्खास्तगी उनके कांग्रेस शासनकाल के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियों को स्वीकार करने के बाद की गई। उन्होंने कहा था कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में गंभीर लापरवाही हुई, कई जगह डुप्लीकेट नाम और कम आबादी वाले क्षेत्रों में संदिग्ध प्रविष्टियां मिलीं। उन्होंने पार्टी पर आरोप लगाया कि ड्राफ्ट चरण में पार्टी की ओर से चुप्पी साधी गई थी, जबकि चुनाव आयोग ने सूची में इस तरह बदलाव किए जो प्रधानमंत्री के हित में थे। उन्होंने हालांकि माना कि समय रहते आपत्ति दर्ज न करना कांग्रेस की विफलता थी और आगे सतर्क रहने की जरूरत है।
कानून मंत्री एच.के. पाटिल ने हाईकमान के फैसले का बचाव करते हुए कहा, “पार्टी अनुशासन बनाए रखा गया है। हाईकमान ने जो फैसला लिया है, हम सबको उसके साथ जाना चाहिए। यह पार्टी के हित में है।” एक तरफ कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ मिलकर देश में चुनाव चुराने का आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी राजन्ना के खुलासे के कारण कांग्रेस को मुंह छुपाने की नौबत आयी थी।
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