वैश्विक मंच पर ‘हिमालय से ऊँची और समंदर से गहरी’ मानी जाने वाली चीन-पाकिस्तान की दोस्ती में दरार आती दिख रही है। भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव और फिर हुए सीजफायर के फैसले ने इस रिश्ते में खटास ला दी है। दरअसल, पाकिस्तान ने भारत के साथ सीजफायर की पहल की, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया। लेकिन जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस शांति प्रयास का श्रेय खुद को दिया, तो चीन नाराज़ हो गया।
चीन का मानना है कि पाकिस्तान ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपने ‘सबसे करीबी दोस्त’ से बात करने की बजाय अमेरिका की ओर रुख किया। चीन को इस बात की उम्मीद थी कि वो मध्यस्थता कर दुनिया के सामने शांति समर्थक देश की छवि पेश कर पाएगा। लेकिन पाकिस्तान की अमेरिका से सीधी बातचीत और ट्रंप के दावे कि सीजफायर उनकी कोशिशों से हुआ, ने चीन को नाराज कर दिया है।
भारत ने साफ कर दिया है कि यह फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे तौर पर हुआ है और इसमें किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का प्रस्ताव आया था, जिसे भारत ने शांति की दिशा में कदम मानकर स्वीकार किया।
इस घटनाक्रम के बाद चीन और पाकिस्तान के रिश्तों में तल्ख़ी बढ़ती दिख रही है। माना जा रहा है कि सीजफायर की सियासत में चीन को दरकिनार किए जाने से वह खुद को ठगा महसूस कर रहा है, वहीं अमेरिका इस मौके का फायदा उठाकर अपनी भूमिका को दुनिया के सामने बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।
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