दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के प्रतिष्ठित रामलीला मैदान से अवैध कब्जों को हटाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने नगर निगम दिल्ली (MCD) और लोक निर्माण विभाग (PWD) को आदेश दिया है कि वे अगले तीन महीनों के भीतर 38,940 वर्ग फुट क्षेत्रफल से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी करें। यह क्षेत्र तुर्कमान गेट के पास स्थित है और लंबे समय से अनधिकृत उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ था।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सेव इंडिया फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका प्रीत सिरोही द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने दावा किया था कि लगातार शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने इस सार्वजनिक भूमि पर हो रहे अतिक्रमणों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अक्टूबर 2025 में MCD, PWD, DDA, L&DO, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस द्वारा तैयार संयुक्त सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 2,512 वर्ग फुट क्षेत्र PWD की सड़क और फुटपाथ पर अवैध कब्जों से प्रभावित है। 36,248 वर्ग फुट क्षेत्र MCD की भूमि पर अतिक्रमित है, जिसमें एक बारात घर (banquet hall), पार्किंग स्थल, निजी डायग्नोस्टिक सेंटर और कई अन्य अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल हैं। रिपोर्ट ने इस पूरे क्षेत्र में फैले अवैध निर्माणों और व्यावसायिक गतिविधियों को सार्वजनिक उपयोग वाली भूमि का दुरुपयोग बताया।
कोर्ट ने फैज़-ए-इलाही मस्जिद और उसके पास स्थित कब्रिस्तान से संबंधित 7,343 वर्ग फुट क्षेत्र पर कार्रवाई से फिलहाल परहेज किया है। इसका कारण यह है कि यह हिस्सा L&DO के अधिकार क्षेत्र में आता है, और कोर्ट ने स्पष्ट किया कि MCD और L&DO के बीच स्वामित्व संबंधी विवाद को वे आपस में ही सुलझाएँ। बेंच ने कहा कि प्रक्रियात्मक स्पष्टता के बिना इस हिस्से पर आदेश देना उचित नहीं होगा।
15 नवंबर को जारी आदेश में कोर्ट ने कहा कि MCD और PWD “अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू करें और तीन महीने में पूरी करें।” साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्षों को सुने जाने का उचित अवसर दिया जाए ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।
बेंच ने टिप्पणी की कि “ऐसे अतिक्रमण सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित सरकारी भूमि पर जारी नहीं रहने दिए जा सकते।” कोर्ट ने संबंधित विभागों को अतिक्रमण हटाने के बाद की गई सभी कार्रवाइयों की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया है। इस निर्णय को दिल्ली के केंद्रीय क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि की पुनर्बहाली की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जहाँ वर्षों से विभिन्न प्रकार के अवैध निर्माण और व्यावसायिक कब्जे बड़ी चुनौती बने हुए थे।
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