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Thursday, February 19, 2026
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दिल्ली को जलभराव से मुक्ति, चार ट्रंक ड्रेनों का निर्माण प्रगति परः सीएम रेखा गुप्ता!

इस परियोजना के तहत सड़क की कुल लंबाई 11.38 किलोमीटर है, जबकि दोनों ओर मिलाकर ड्रेन की कुल लंबाई 22.76 किलोमीटर होगी।

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने दिल्ली को आधुनिक, वैश्विक और विकसित राजधानी बनाने के संकल्प की दिशा में जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। इसके तहत दिल्ली के चार बड़े नालों- मुंडका हॉल्ट-सप्लीमेंट्री ड्रेन, एमबी रोड स्टॉर्म वॉटर ड्रेन, किराड़ी-रिठाला ट्रंक ड्रेन और रोहतक रोड (एनएच-10) स्थित स्टॉर्म वॉटर ड्रेन को ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ के तहत अहम घटक के रूप में विकसित किया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने इन बड़े ट्रंक ड्रेनों के निर्माण और विस्तार के कार्य की गति को तेज कर दिया है।

सीएम रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि 1970 के दशक में दिल्ली के सीवर सिस्टम व जलनिकासी को लेकर ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ बनाया गया था। बढ़ती आबादी और तेज निर्माण गतिविधियों के बावजूद इस मास्टर प्लान में अपेक्षित बदलाव नहीं हो पाए, जिससे जलनिकासी की स्थिति लगातार गंभीर होती रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने दिल्ली की भौगोलिक स्थिति, जलभराव व आबादी के दबाव को ध्यान में रखते हुए प्रभावी परिवर्तन किए हैं और उसी हिसाब से नालों आदि का निर्माण किया जा रहा है, ताकि भविष्य में देश की राजधानी को जलभराव व उससे जुड़ी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का मानना है कि किसी भी महानगर की वास्तविक पहचान उसकी मजबूत, वैज्ञानिक और दूरगामी जल-निकासी व्यवस्था से होती है। इसी सोच के तहत दिल्ली सरकार ने राजधानी के उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है, जहां वर्षों से जलभराव, ओवरलोडेड सीवर लाइनों व अन्य समस्याओं के कारण आमजन को भारी परेशानी झेलनी पड़ती रही है। अब दिल्लीवासियों को इससे निजात मिलेगी।

पश्चिमी दिल्ली के किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई विधानसभा क्षेत्रों की जल-निकासी समस्या के समाधान के लिए रेलवे लाइन के समानांतर 4.5 किलोमीटर लंबे ट्रंक ड्रेन का निर्माण प्रस्तावित किया गया है।इस ड्रेन का निर्माण सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा किया जा रहा है। इस नाले की अनुमानित लागत 220.93 करोड़ रुपए है और इसे 1,520 एकड़ के बड़े कैचमेंट एरिया से आने वाले वर्षा जल को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है।

नाले की डिस्चार्ज क्षमता 760 क्यूसेक रखी गई है, ताकि मॉनसून के दौरान चरम वर्षा की स्थिति में भी जल निकासी बिना रुके हो सके। नाले की शुरुआत मुंडका हॉल्ट स्टेशन से होगी और यह रेलवे कॉरिडोर के साथ-साथ चलते हुए सप्लीमेंट्री ड्रेन में जाकर मिलेगा।

इस ड्रेन की विशेषता यह है कि इसके मार्ग में आने वाले विभिन्न सेकेंडरी ड्रेनों का पानी भी इसमें समाहित किया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र की जल-निकासी व्यवस्था एकीकृत और सुव्यवस्थित हो सकेगी। प्रस्तावित कार्य रेलवे भूमि सीमा के भीतर किया जाना है, जिसके लिए रेलवे के साथ एमओयू पहले ही साइन किया जा चुका है।

इस परियोजना को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जल्द मिलने वाली है। स्वीकृति मिलते ही इसे 15 माह की समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दक्षिण दिल्ली के लाडो सराय टी-पॉइंट से पुल प्रह्लादपुर तक फैले क्षेत्र में जलभराव की समस्या लंबे समय से गंभीर बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए एमबी रोड स्टॉर्म वॉटर ड्रेन परियोजना को ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ में शामिल किया गया है।

इस परियोजना के तहत सड़क की कुल लंबाई 11.38 किलोमीटर है, जबकि दोनों ओर मिलाकर ड्रेन की कुल लंबाई 22.76 किलोमीटर होगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 387.84 करोड़ रुपये है। इसे 2.5 वर्षों में पूरा कर लिया जाएगा, जिसमें 6 माह प्री-कंस्ट्रक्शन और 2 वर्ष निर्माण अवधि शामिल है। इस नाले का निर्माण दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा किया जा रहा है।

यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मौजूदा स्टॉर्म वॉटर ड्रेन कई स्थानों पर या तो अपर्याप्त क्षमता के हैं या फिर अन्य निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, परियोजना में करीब 500 पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन/कटान, फुटपाथ निर्माण और बिजली, जल बोर्ड व अन्य यूटिलिटीज के शिफ्टिंग का भी प्रावधान किया गया है।

उत्तर-पश्चिम दिल्ली में किराड़ी से रिठाला (रोहिणी के पास) तक प्रस्तावित 7,200 मीटर लंबे ट्रंक ड्रेन का निर्माण एक और महत्वपूर्ण परियोजना है। डीडीए की इस परियोजना की अनुमानित लागत 250.21 करोड़ रुपए है और इसकी डिजाइन डिस्चार्ज क्षमता 1,160 क्यूसेक रखी गई है। वर्तमान स्थिति में इस नाले का लगभग 600 मीटर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। बचा कार्य 84 पेड़ों की कटाई की अनुमति लंबित होने के कारण रुक गया था, जिसे अब सुलझा लिया गया है।

इसके अलावा, रोहतक रोड (एनएच-10) पर जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए स्टॉर्म वॉटर ड्रेन का सुधार का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी की इस परियोजना के अंतर्गत नांगलोई रेलवे मेट्रो स्टेशन के पास किराड़ी सुलेमान ड्रेन से हिरण कूदना ड्रेन (मेट्रो पिलर संख्या 428 से 626) और टीकरी बॉर्डर से हिरण कूदना ड्रेन (मेट्रो पिलर संख्या 753 से 626) तक दोनों तरफ ड्रेन का निर्माण व सुधार किया जा रहा है।

इस परियोजना की अनुमानित लागत 184 करोड़ है, जिसमें से भारत सरकार ने ‘पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई)’ योजना के अंतर्गत 105 करोड़ 2025-26 में दिए हैं। इस परियोजना को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली का ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ राजधानी के बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या दबाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य प्रमुख ट्रंक ड्रेनों की क्षमता बढ़ाकर वर्षा जल को सुरक्षित और तेजी से यमुना तक पहुंचाना, सीवर प्रणाली पर दबाव कम करना और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह प्रयास राजधानी की जल-निकासी व्यवस्था को भविष्य-सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस और निर्णायक कदम है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली के बड़े हिस्से को हर मॉनसून में होने वाली जलभराव की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी।
 
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