भोपाल में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने लंबे सार्वजनिक अंतराल को तोड़ते हुए तीखे और सांकेतिक टिप्पणी की। जुलाई में अचानक दिए इस्तीफे के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था, जिसमें उन्होंने बिना किसी नाम लिए राजनीतिक नैरेटिव, व्यक्तिगत अनुभवों और हाल के घटनाक्रमों पर परोक्ष प्रहार किए।
जगदीपधनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दिया था। इस ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि नैरेटिव के जाल में फँसना खतरनाक है। उन्होंने कहा, “ईश्वर न करे कोई भी नैरेटिव में फँस जाए। अगर कोई इस चक्रव्यूह में फँस गया, तो बाहर निकलना बेहद कठिन हो जाता है।” इसके तुरंत बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए जोड़ा, “मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा हूँ।” इस पर सभागार में ठहाके गूँज उठे।
धनखड़ के इस्तीफे के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि उनकी बेबाकी और सरकार पर कई मुद्दों पर कटाक्ष ने सत्ता पक्ष के साथ तनाव पैदा किए। विपक्ष ने भी सवाल उठाया कि कार्यकाल खत्म होने में दो वर्ष बाकी रहते हुए ‘स्वास्थ्य कारणों’ का तर्क विश्वसनीय नहीं लगता। धनखड़ ने चार महीने बाद सार्वजनिक रूप से सामने आते हुए कहा, “चार महीने बाद, इस अवसर पर, इस पुस्तक पर, इस शहर में… मुझे बोलने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।”
कार्यक्रम में RSS के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य की पुस्तक का विमोचन हुआ। धनखड़ ने पुस्तक के बारे में कहा,”यह पुस्तक उन लोगों को जगाएगी जो सोए हुए हैं। यह हमें हमारे सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराएगी।”इसके बाद उन्होंने भाषण के बीच में ही अंग्रेजी में बोलना शुरू कर दिया और कहा कि कुछ लोग “जो समझना नहीं चाहते या जो छवि को धूमिल करना चाहते हैं” उन्हें उनके दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से समझना चाहिए।
VIDEO | Jagdeep Dhankhar, who has maintained a low profile since stepping down exactly four months ago citing health reasons, made his first public address on Friday at a book launch, praising the RSS philosophy and vision of making a stronger nation.
Jagdeep Dhankhar says,… pic.twitter.com/496pmUvF0u
— Press Trust of India (@PTI_News) November 21, 2025
अपने भाषण के दौरान, धनखड़ को अपने ओएसडी (विशेष कार्य अधिकारी) से उनकी उड़ान के बारे में एक संदेश मिला, जो शाम 7.30 बजे की थी। हालाँकि, धनखड़ ने आगे कहा, “मैं उड़ान की चिंता में अपने कर्तव्य से विमुख नहीं हो सकता। मेरा हालिया अतीत इसका प्रमाण है।” समापन से पहले धनखड़ ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “समय की कमी के कारण मैं पूरी बात नहीं कह सका।”
धनखड़ के भोपाल आगमन पर न तो राज्य सरकार और न ही BJP का कोई वरिष्ठ नेता उन्हें रिसीव करने पहुँचा। इसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी।
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