भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर सुरक्षा के लिहाज़ से सेंसिटिव इलाकों में फेंस लगाने का काम तेज़ हो गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने मई से अब तक बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (BSF) को 1,177.1 एकड़ ज़मीन ट्रांसफर कर दी है। इससे कई सालों से रुके हुए फेंसिंग के काम में एक बड़ी एडमिनिस्ट्रेटिव रुकावट दूर हो गई है। मुर्शिदाबाद, मालदा और नॉर्थ 24 परगना ज़िलों के सेंसिटिव इलाकों में फेंसिंग का काम शुरू हो गया है।
बांग्लादेश के साथ पश्चिम बंगाल का इंटरनेशनल बॉर्डर करीब 2,216.7 km लंबा है। भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के कुल 4,096.7 km में से, सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल से होकर गुज़रता है। राज्य में बिना फेंस वाले बॉर्डर इलाकों ने सुरक्षा सिस्टम के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इंटरनेशनल बॉर्डर पर दूर-दराज के इलाके, घनी आबादी और खेती की वजह से कई जगहों पर फेंसिंग का काम रुका हुआ था।
राज्य सरकार के होम डिपार्टमेंट के मुताबिक, मई से अब तक BSF को 1,177.1 एकड़ ज़मीन ट्रांसफर की जा चुकी है। इससे पहले, खबर आई थी कि जुलाई में करीब 1,024.75 एकड़ ज़मीन ट्रांसफर की गई थी। तब से, और ज़मीन मिल गई है, जिससे और बॉर्डर इलाकों में काम शुरू करना मुमकिन हो गया है।
बॉर्डर फेंसिंग के लिए मुर्शिदाबाद ज़िले में सबसे ज़्यादा 362.8 एकड़ ज़मीन है। इसके बाद मालदा ज़िले में 247.7 एकड़ और नॉर्थ 24 परगना ज़िले में 243.7 एकड़ ज़मीन है। नदिया, कूच बिहार, जलपाईगुड़ी और दिनाजपुर ज़िलों के कुछ हिस्सों में भी फेंसिंग के लिए ज़मीन मिल गई है।
नदी के इलाकों में अभी भी मुश्किलें हैं
हालांकि ज़मीन ट्रांसफर से फेंसिंग के काम को बढ़ावा मिला है, लेकिन पश्चिम बंगाल में करीब 569 km बॉर्डर पर अभी भी कन्वेंशनल फेंस नहीं है। इस हिस्से का करीब 113 km हिस्सा नदी के किनारे है, जिससे कन्वेंशनल फेंस लगाना मुश्किल या नामुमकिन हो जाता है। बाकी हिस्से में ज़मीन की कमी और दूसरी एडमिनिस्ट्रेटिव दिक्कतें हैं। नदी के बहाव में बदलाव, मॉनसून में बाढ़ और मिट्टी के कटाव की वजह से नदी के इलाकों में पक्की बाड़ लगाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए, BSF को ऐसे इलाकों में पेट्रोलिंग, सर्विलांस और दूसरे सुरक्षा उपायों को मिलाकर इस्तेमाल करना पड़ता है।
यह भी पढ़ें-
