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Thursday, April 16, 2026
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संसद से पास हुआ फाइनेंस बिल 2026, बजट प्रस्तावों को मिली कानूनी मंजूरी!

केंद्रीय बजट 2026-27 में कुल खर्च 53.47 लाख करोड़ रुपए रखा गया है, जो चालू वित्त वर्ष (31 मार्च तक) के मुकाबले 7.7 प्रतिशत ज्यादा है।

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संसद ने शुक्रवार को फाइनेंस बिल 2026 को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने इसे ध्वनि मत (वॉइस वोट) से लोकसभा को वापस भेज दिया, जिससे केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रस्तावों को कानूनी समर्थन प्रदान करने की विधायी प्रक्रिया पूरी हो गई, जो 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में लागू होंगे।

लोकसभा ने 25 मार्च को इस बिल को 32 संशोधनों के साथ पास किया था। इसके बाद राज्यसभा में इस पर संक्षिप्त चर्चा हुई और सांसदों के सवालों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया, जिसके बाद बिल को मंजूरी दे दी गई।

केंद्रीय बजट 2026-27 में कुल खर्च 53.47 लाख करोड़ रुपए रखा गया है, जो चालू वित्त वर्ष (31 मार्च तक) के मुकाबले 7.7 प्रतिशत ज्यादा है।

इस बजट में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) का प्रस्ताव है, जिससे अर्थव्यवस्था में विकास और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, जो पिछले साल के मुकाबले 2.2 लाख करोड़ रुपए ज्यादा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने के लिए एक ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क डेवलपमेंट फंड’ बनाया जाएगा।

उन्होंने 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा को घटाकर जीडीपी के 4.3 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य भी रखा है। सरकार आर्थिक विकास के साथ-साथ वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की दिशा में काम कर रही है। राजकोषीय घाटा का मतलब सरकार के कुल खर्च और कुल आय के बीच का अंतर होता है।

सरकार वित्त वर्ष 2027 में इस घाटे को पूरा करने के लिए 11.7 लाख करोड़ रुपए का नेट उधार लेगी, जबकि कुल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है।

बजट में हाईवे, पोर्ट, रेलवे और पावर प्रोजेक्ट्स जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मजबूत करने के साथ-साथ 7 रणनीतिक सेक्टर्स में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और MSMEs को आगे लाने पर जोर दिया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने वित्तीय अनुशासन और मौद्रिक स्थिरता बनाए रखते हुए सार्वजनिक निवेश पर मजबूत फोकस रखा है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 56.1 प्रतिशत हो गया है, जिसे वित्त वर्ष 2026-27 में और घटाकर 55.6 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि इस अनुपात में कमी आने से ब्याज भुगतान का बोझ घटेगा, जिससे राजकोषीय घाटा कम रखने और विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

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