अजीत डोभाल की कनाडा यात्रा के बाद दोनों का साइबर सुरक्षा, लायज़ॉन अधिकारी खालिस्तानी नेटवर्क पर सख्त संदेश

अजीत डोभाल की यात्रा ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि निज्जर प्रकरण से आगे बढ़कर दोनों देश रिश्तों को नए सिरे से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

अजीत डोभाल की कनाडा यात्रा के बाद दोनों का साइबर सुरक्षा, लायज़ॉन अधिकारी खालिस्तानी नेटवर्क पर सख्त संदेश

Following Ajit Doval's visit to Canada, both countries issued a strong message on cybersecurity, liaison officers, and the Khalistani network.

भारत और कनाडा के रिश्तों में खटास कम होने के संकेत मिल रहें है, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शनिवार (8 फरवरी) को ओटावा में अपने कनाडाई समकक्ष नथाली ड्रुइन से मुलाकात की। ड्रुइन कनाडा के प्रधानमंत्री की डिप्टी क्लर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा व खुफिया सलाहकार हैं। इस बैठक में दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन से जुड़े मुद्दों पर सहयोग के लिए एक साझा कार्ययोजना पर सहमति जताई।

बैठक के बाद यह भी तय किया गया कि भारत और कनाडा एक-दूसरे के यहां सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन लायज़ॉन अधिकारी नियुक्त करेंगे। इसका उद्देश्य ड्रग तस्करी, संगठित अपराध और सीमा-पार आपराधिक नेटवर्क जैसे साझा खतरों से निपटना है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा, “बैठक के दौरान यह सहमति बनी कि दोनों देश सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन लायज़ॉन अधिकारी स्थापित करेंगे और उनकी संबंधित एजेंसियां कार्य-संबंधों को आगे बढ़ाएंगी।” मंत्रालय के अनुसार, इससे द्विपक्षीय संचार सुगम होगा और ड्रग तस्करी तथा संगठित अपराध जैसे मुद्दों पर समय पर सूचना साझा करना संभव हो सकेगा।

डोभाल और ड्रुइन के बीच बातचीत में कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी समूहों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। रिपोर्ट के मुताबिक, डोभाल ने ड्रग मनी, दस्तावेजों से धोखाधड़ी और जबरन वसूली से जुड़े चरमपंथी फंडरेज़िंग, धमकी और प्रचार गतिविधियों पर चिंता जताई, जो भारत को निशाना बनाती हैं। डोभाल की ड्रुइन के अलावा कनाडा के पब्लिक सेफ्टी मंत्री गैरी आनंद संगरी से भी बातचीत हुई।

सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों के बाद कनाडाई सरकार ने यह स्वीकार किया है कि भारत के खिलाफ निर्देशित हिंसक चरमपंथ अब केवल कूटनीतिक असहजता नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का भी गंभीर मुद्दा है। लंबे समय से कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्व भारत–कनाडा संबंधों में तनाव का कारण रहे हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहगार की यात्रा का एक अहम नतीजा साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी सामने आया है। दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा नीति पर औपचारिक सहयोग और इस क्षेत्र में सूचना साझा करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप धोखाधड़ी और इमिग्रेशन प्रवर्तन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

हालांकि कुछ विश्लेषक इसे ‘बिग-बैंग’ कूटनीतिक सफलता नहीं मानते, लेकिन इस यात्रा का महत्व ठोस और व्यावहारिक कदमों में निहित है। रिपोर्ट के अनुसार, कानून-प्रवर्तन लायज़ॉन अधिकारियों की तैनाती का फैसला इस बात की साझा स्वीकारोक्ति है कि खालिस्तानी नेटवर्क को अब अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं मिलेगी, बल्कि इसे अब संगठित अपराध के रूप में देखा जा रहा है।

दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मार्च के पहले सप्ताह में भारत आने की संभावना है। भारत में कनाडा के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने पहले मीडिया से कहा था कि इस दौरान यूरेनियम, ऊर्जा, खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इसके साथ ही समग्र आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर औपचारिक वार्ता मार्च में शुरू होने की उम्मीद है, जो दोनों देशों ने पिछले नवंबर में ठप पड़ी व्यापार वार्ताओं को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी।

2023 में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय अधिकारियों पर बेतुके आरोप लगाए थे, जिससे भारत–कनाडा के राजनीतिक संबंध अपने निचले स्तर पर पहुंच गए थे। नई दिल्ली ने इन आरोपों को “बेतुका” बताते हुए, राजनयिकों का निष्कासन, व्यापार वार्ताओं का निलंबन और राजनीतिक संवाद रोके थे।

कार्नी के सत्ता में आने के बाद हालात बदलते दिख रहे हैं। जून में कनाडा के कनानास्किस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कार्नी की मुलाकात हुई थी, जहां दोनों ने रिश्तों में स्थिरता लाने के लिए संतुलित और रचनात्मक कदम उठाने पर सहमति जताई थी। इसके बाद दोनों देशों ने अपने-अपने उच्चायुक्तों की नियुक्ति की और नवंबर में जोहान्सबर्ग में फिर मुलाकात कर CEPA वार्ता शुरू करने पर सहमति बनाई।

कनाडा की भारत के साथ यह नई पहल ऐसे समय पर हो रही है, जब ओटावा अमेरिका पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। एक पूर्व कनाडाई राजनयिक के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और वैश्विक भूमिका ने ओटावा और नई दिल्ली दोनों को अपने विकल्पों में विविधता लाने के लिए मजबूर किया है।

फिलहाल, भारत–कनाडा संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, यह देखना बाकी है, लेकिन अजीत डोभाल की यात्रा ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि निज्जर प्रकरण से आगे बढ़कर दोनों देश रिश्तों को नए सिरे से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

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