संसद सत्र का चौथा दिन, लोकसभा स्थगित, विपक्ष ने किया प्रदर्शन!

सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव के चलते सत्र में अब तक कोई ठोस कामकाज नहीं हो सका है।

संसद सत्र का चौथा दिन, लोकसभा स्थगित, विपक्ष ने किया प्रदर्शन!

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संसद के मानसून सत्र का आज चौथा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई, जबकि संसद भवन के बाहर विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव के चलते सत्र में अब तक कोई ठोस कामकाज नहीं हो सका है।

संसद के मानसून सत्र का आज चौथा दिन भी भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा की कार्यवाही बार-बार के व्यवधान के बाद स्थगित कर दी गई, जबकि संसद परिसर के बाहर विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

सुबह जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने महंगाई, बेरोजगारी, कथित घोटालों और किसान मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित हुई, और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

संसद के बाहर विपक्षी प्रदर्शन​: कांग्रेस, आप, टीएमसी, डीएमके, राजद, समाजवादी पार्टी और लेफ्ट दलों समेत I.N.D.I.A गठबंधन के नेताओं ने संसद परिसर के बाहर धरना दिया। विपक्षी नेताओं ने हाथों में तख्तियां लिए हुए “संविधान बचाओ”, “लोकतंत्र बचाओ”, और “जनता के मुद्दे उठाओ” जैसे नारे लगाए।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनहित के गंभीर मुद्दों पर चर्चा से बच रही है और विपक्ष की आवाज़ को दबा रही है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “सदन जनता की आवाज़ उठाने का मंच है, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय बहस से भाग रही है।”

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा को तैयार है, लेकिन विपक्ष का व्यवहार गैर-जिम्मेदाराना है।

मुख्य मुद्दे जिन पर विपक्ष हमलावर है: बढ़ती महंगाई और रसोई गैस के दाम, बेरोजगारी और निजीकरण की नीतियां, किसानों के समर्थन मूल्य और कर्ज माफी का मुद्दा, हालिया घोटालों व केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप और मणिपुर और हरियाणा हिंसा जैसे संवेदनशील विभिन्न गंभीर मुद्दों लेकर जमकर हंगामा किया जा​ रहा है|

सत्र के अभी कई दिन बाकी हैं, लेकिन अब तक का माहौल यह संकेत देता है कि सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तीखा हो सकता है। अगर संवाद की कोई पहल नहीं होती है तो यह सत्र भी अधूरा और निष्प्रभावी रह सकता है।

 
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