वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों पर उन्होंने कहा, “अगर एसआईआर में कोई गलतियां हुई हैं तो चुनाव आयोग समय-समय पर उन्हें सुधारने के अवसर देता है। अगर कोई त्रुटि है तो जिम्मेदारी उस व्यक्ति की है जो बूथ पर गया और बूथ लेवल अधिकारी के रूप में काम किया। हर पार्टी ने अपने बूथ-स्तरीय प्रतिनिधि नियुक्त किए थे। सपा, बसपा या दूसरी पार्टियों के बीएलओ जो इस कार्य में लगे हुए थे, वे क्या देख रहे थे। इनके बीएलओ क्या सिर्फ सो रहे थे।”
वहीं, मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कोलकाता की घटना को दुखद बताया। उन्होंने कहा, “यह घटना दुखद है, वहां के मुख्यमंत्री ने जो ऐलान किया है, वह पीड़ित परिवार को राहत देने का काम है।” राजभर ने प्रधानमंत्री द्वारा दी गई सहायता राशि को भी अच्छा कदम बताया।
रिजीम चेंज वाले बयान पर राजभर ने कहा, “भारत और बांग्लादेश की तुलना संवैधानिक रूप से नहीं की जा सकती। भारत में ऐसा संभव नहीं है।”
अभिजीत दिपके की जमानत और मार्च पर प्रतिबंध के सवाल पर उन्होंने कहा, “यह अदालत का मामला है।” मार्च पर प्रतिबंध को लेकर उन्होंने कहा, “जहां अगर आपको अनुमति न हो, अगर वहां कार्यक्रम करेंगे, तो आप पर कार्रवाई नहीं होगी क्या।”
बता दें कि इससे पहले 17 अक्टूबर को राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था, “राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने हमेशा संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। वे उसी चुनाव आयोग के तहत सांसद बने, जिसकी वे अब आलोचना कर रहे हैं।
