दिग्विजय सिंह ने कहा कि ये वही सवाल हैं जो वे लंबे समय से उठाते रहे हैं और आज भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 22 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर आरएसएस के पंजीयन, वित्तीय स्रोतों, आय-व्यय और कर अनुपालन की जांच तथा पारदर्शिता की मांग की थी।
उन्होंने सवाल उठाया था कि जब देश के सभी ट्रस्ट, सोसायटी, स्वयंसेवी संगठन और राजनीतिक दल वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन के दायरे में आते हैं तो करोड़ों रुपए के लेन-देन करने वाले बड़े संगठन पर समान नियम क्यों लागू नहीं होते।
दिग्विजय सिंह ने यह भी दावा किया कि कोविड-19 महामारी के दौरान आरएसएस द्वारा करोड़ों खाने के पैकेट और राशन वितरण किया गया था, लेकिन इस पर खर्च हुए धन का स्रोत आज तक स्पष्ट नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि 12 नवंबर 2025 को उन्होंने मोहन भागवत को पत्र लिखकर उनके एक बयान पर आपत्ति जताई थी, जिसमें आरएसएस की अपंजीकृत स्थिति की तुलना हिंदू धर्म से की गई थी। दिग्विजय सिंह ने कहा कि किसी भी संगठन की तुलना सनातन धर्म से करना उचित नहीं है और आरएसएस को हिंदू धर्म का पर्याय नहीं माना जा सकता।
उन्होंने अपने पत्र में संगठन की कानूनी स्थिति, वित्तीय स्रोतों, आय-व्यय और कर अनुपालन से जुड़े कई प्रश्न भी उठाए थे, जिनका अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रियंक खड़गे द्वारा उठाए गए सवाल भी उन्हीं मुद्दों से जुड़े हैं जिन्हें वे लंबे समय से उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह किसी संगठन या व्यक्ति के विरोध का विषय नहीं है, बल्कि संविधान, कानून के शासन और पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा है।
दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर मांग की कि आरएसएस अपना पंजीयन कराते हुए अपनी कानूनी स्थिति, संगठनात्मक ढांचा, वित्तीय स्रोत, आय-व्यय और कर अनुपालन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता के अनुरूप होगा।
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