यह समझौता लगभग दो दशकों की लंबी बातचीत के बाद अंतिम रूप ले सका, जिसे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ‘सभी डील्स की जननी’ कहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक बताया, जो वैश्विक जीडीपी के 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है।
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस समझौते की जमकर तारीफ की। उन्होंने लिखा, “भारत के लिए यह कितना ऐतिहासिक पल है- ‘सभी डील्स की जननी’ यहां है! शिवसेना संसदीय दल की ओर से, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए हार्दिक धन्यवाद देता हूं।”
श्रीकांत शिंदे ने आगे कहा कि यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए बड़े अवसर खोलेगा, निर्यात बढ़ाएगा, रोजगार पैदा करेगा और भारत के वैश्विक आर्थिक नेतृत्व को मजबूत करेगा। उन्होंने इसे दो वैश्विक दिग्गजों की नई शुरुआत बताया।
समझौते के तहत भारत ईयू के 96.6 प्रतिशत निर्यात पर टैरिफ खत्म या कम करेगा, जबकि ईयू भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर चरणबद्ध तरीके से टैरिफ घटाएगा। इससे ईयू के सामान जैसे कारों (110 से घटकर 10 प्रतिशत तक), मशीनरी, रसायन, दवाओं पर टैरिफ कम होंगे।
भारत के टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और प्लास्टिक जैसे क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी। समझौते से 2032 तक ईयू के भारत निर्यात को दोगुना करने की उम्मीद है। यह समझौता ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों के बीच भारत और ईयू के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



