संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अफगानिस्तान पर बैठक में भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद पर बड़ा हमला बोला। भारत ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह सुनिश्चित करे कि ये संगठन अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए न कर सकें।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि अफगानिस्तान की शांति और स्थिरता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और आतंकवादियों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी जानी चाहिए।
हरीश ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद से मुकाबला करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने याद दिलाया कि यूएनएससी द्वारा घोषित आतंकी संगठन जैसे आईएसआईएस, अल-कायदा, लश्कर और जैश पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है। भारत ने दोहराया कि केवल दंडात्मक कदमों से समस्या का समाधान संभव नहीं, बल्कि व्यावहारिक और सकारात्मक नीति अपनानी होगी।
भारत ने इस मौके पर अफगानिस्तान को लगातार दी जा रही मानवीय और विकासात्मक मदद का भी उल्लेख किया। अगस्त 2021 में तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद से भारत ने 50,000 टन गेहूं, 330 टन से ज्यादा दवाएं, टीके और अन्य आवश्यक सामग्री भेजी है। हाल ही में आए भूकंप के बाद भारत ने टेंट, खाद्य सामग्री, दवाएं और राहत उपकरण भी तत्काल भेजे।
भारत ने बताया कि अब तक अफगानिस्तान में 500 से अधिक विकास परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य शामिल हैं। भारत का मानना है कि गरीबी और भुखमरी खत्म किए बिना शांति और स्थिरता संभव नहीं।
भारत ने सुरक्षा परिषद को स्पष्ट संदेश दिया कि अफगानिस्तान की मदद के लिए उसकी प्रतिबद्धता अटल है और वह शांति, स्थिरता व विकास के लिए सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।
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