साउथ ईस्ट एशिया और इंडो-पैसिफिक रीजन में सिक्योरिटी में बढ़ती चुनौतियों के बीच, इंडियन डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने US डिफेंस सेक्रेटरी पीटर हेगसेथ से मुलाकात की है। यह हाई-लेवल बाइलेटरल मीटिंग फिलीपींस के सेबू शहर में हुई 13वीं ‘आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग-प्लस’ (ADMM-प्लस) के दौरान हुई। चर्चा में दोनों वर्ल्ड पावर्स के बीच डिफेंस कोऑपरेशन, मिलिट्री टेक्नोलॉजी के को-प्रोडक्शन और जानकारी के एक्सचेंज को और तेज करने पर सहमति बनी। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि इंडिया-US पार्टनरशिप एक फ्री, ओपन और सिक्योर इंडो-पैसिफिक रीजन बनाने के लिए एक मजबूत नींव है।
Had an excellent meeting with US Secretary of War Pete Hegseth on the sidelines of the 13th ADMM-Plus.
We reviewed the progress of our 10-year India-US Defence Framework, driving strategic convergence across military technology, information sharing, and co-production. Our robust partnership continues to be a cornerstone for a free, open, and secure Indo-Pacific. @SecWar
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) October 28, 2026
इस मीटिंग के बाद, डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि, दोनों देशों ने अपने 10 साल पुराने इंडिया-US मेजर डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क की प्रोग्रेस का रिव्यू किया है। इस फ्रेमवर्क ने मिलिट्री कोऑपरेशन, दोनों सेनाओं के बीच कोऑर्डिनेशन, कटिंग-एज टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर और डिफेंस इक्विपमेंट के जॉइंट प्रोडक्शन के फील्ड में एक बड़ी क्रांति ला दी है। राजनाथ सिंह 28 और 29 अक्टूबर को सेबू में होने वाले समिट में इंडियन डेलीगेशन को लीड कर रहे हैं, और वे रीजनल सिक्योरिटी इशू पर इंडिया का स्टैंड पेश करेंगे।
इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी और 10-ईयर डिफेंस प्लान
पिछले एक दशक में इंडिया और US के बीच डिप्लोमैटिक और मिलिट्री रिलेशन तेजी से बढ़े हैं। सेबू में मीटिंग के दौरान, दोनों लीडर्स ने डिफेंस सेक्टर में को-प्रोडक्शन को और बढ़ावा देने पर चर्चा की। इससे इंडिया के ‘मेक इन इंडिया’ इनिशिएटिव को काफी बढ़ावा मिलेगा। US के डिफेंस सेक्रेटरी पीटर हेगसेथ ने भी मीटिंग के बाद सैटिस्फैक्शन जाहिर किया और कहा कि इंडिया इंडो-पैसिफिक रीजन में एक बहुत इंपॉर्टेंट और ट्रस्टेड पार्टनर है।
इंडो-पैसिफिक ओशन में चीन के बढ़ते अग्रेसन को रोकने और मैरीटाइम ट्रेड रूट्स को सिक्योर करने के लिए इंडिया और US का एक साथ आना बहुत जरूरी माना जा रहा है। मीटिंग में न सिर्फ बाइलेटरल रिलेशन बल्कि साउथ चाइना सी और इंडियन ओशन में मैरीटाइम सिक्योरिटी पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच रेगुलर मिलिट्री एक्सरसाइज और इंटेलिजेंस शेयरिंग को और मज़बूत करने का फैसला किया।
ADMM-प्लस कॉन्फ्रेंस और भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’
एसोसिएशन ऑफ़ साउथईस्ट एशियन नेशंस (ASEAN) साउथईस्ट एशियाई देशों का एक बड़ा संगठन है, जबकि ‘ADMM-प्लस’ ASEAN के सदस्य देशों और उनके आठ बड़े डायलॉग पार्टनर्स (भारत, US, चीन, रूस, जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड) के बीच सबसे हाई सिक्योरिटी फोरम है। 2026 में कॉन्फ्रेंस की प्रेसीडेंसी फिलीपींस के पास है, और इस साल का मेन एजेंडा रीजनल पीस, मैरीटाइम सिक्योरिटी और काउंटर-टेररिज्म है।
भारत 1992 में ASEAN का डायलॉग पार्टनर बना था, और 2010 से ADMM-प्लस के ज़रिए इन देशों के साथ सहयोग कर रहा है। इस प्लेटफॉर्म को भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत बहुत ज़रूरी माना जाता है। इस पॉलिसी के तहत, भारत 2024 से 2027 के समय के लिए मलेशिया के साथ ‘काउंटर-टेररिज्म पर एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप’ की को-चेयर कर रहा है। इससे साउथ-ईस्ट एशियाई देशों में एक जिम्मेदार और ताकतवर देश के तौर पर भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।
ग्लोबल पॉलिटिक्स और रीजनल बैलेंस पर असर
फिलीपींस में हुई इस मीटिंग को ग्लोबल पॉलिटिक्स में एक बड़ा सिग्नल माना जा रहा है। सेबू में होने वाली इस समिट में चीन और रूस के रिप्रेजेंटेटिव भी मौजूद हैं। ऐसे में, भारत और US की तरफ से दिया गया कोऑपरेशन का मैसेज इंडो-पैसिफिक रीजन में पावर बैलेंस बनाए रखने के लिए अहम होगा।
राजनाथ सिंह के दौरे से न सिर्फ US, बल्कि फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर और जापान जैसे देशों के साथ भी भारत के मिलिट्री रिश्ते मजबूत होंगे। ये डेवलपमेंट दिखाते हैं कि भारत एशिया-पैसिफिक रीजन में शांति और स्टेबिलिटी बनाने के लिए अपनी डिप्लोमैटिक और मिलिट्री ताकत का असरदार तरीके से इस्तेमाल कर रहा है।
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