भारत, हजारों वर्षों से विश्व मंच पर अपनी पहचान बनाए रखी है। 1947 में ब्रिटिश शासन से मुक्त होने के बाद देश ने अनेक चुनौतियों का सामना किया। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक जीडीपी का मात्र 2 प्रतिशत थी, साक्षरता दर 7 प्रतिशत और औसत आयु सिर्फ 28 वर्ष थी।
विभाजन ने व्यापारिक मार्गों को तोड़ दिया और उद्योग लगभग नष्ट हो चुके थे। लेकिन कठिनाइयों के बावजूद भारत ने अवसर खोजे और सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की।
आजादी के 78 साल बाद भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। औसत आयु बढ़कर 73 वर्ष हो गई है और देश विज्ञान, तकनीक और व्यापार में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव, व्यापारिक टैरिफ और आंतरिक सामाजिक चुनौतियां अब भी सामने हैं।
कुछ अंतरराष्ट्रीय शक्तियां भारत को अलग-थलग करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अब भारत इतना मजबूत हो चुका है कि किसी दबाव में राष्ट्रीय हितों के खिलाफ निर्णय नहीं ले सकता।
1.4 अरब की आबादी में 60 प्रतिशत से अधिक युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत है। यही ऊर्जा और आत्मविश्वास हमें आगे बढ़ा रहे हैं। भारत के पास वैश्विक मंच पर संबंधों को और विविध करने, व्यापार का विस्तार करने और रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाने के अनेक अवसर हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले 3-5 वर्षों में अगर 10-15 राज्य आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएं तो विकास कई गुना बढ़ सकता है।
आज भारत एक निर्णायक मोड़ पर है। संभावना और उपलब्धि के बीच की दूरी को पाटने के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। एकजुट होकर ही हम भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।
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