ईरानी रेजीम को ट्रंप की चेतावनी: प्रदर्शनकारियों को मारने पर गोली चलाई गई तो भुगतना पड़ेगा

ईरानी रेजीम को ट्रंप की चेतावनी: प्रदर्शनकारियों को मारने पर गोली चलाई गई तो भुगतना पड़ेगा

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ईरान में गहराते आर्थिक संकट के बीच भड़के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान की सुरक्षा एजेंसियां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती हैं और उनकी हत्या होती है, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं, ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े वरिष्ठ सलाहकारों ने इस चेतावनी को खारिज करते हुए इसे क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाने वाला कदम बताया है।

शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, “यदि ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गोली मारता है और हिंसक तरीके से उनकी हत्या करता है, जैसा कि उनकी आदत है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उन्हें बचाने आएगा। हम लॉक्ड और लोडेड हैं और जाने के लिए तैयार हैं। इस विषय पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद! राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान में पिछले तीन वर्षों के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं, जिनकी जड़ में मुद्रा रियाल का तेज़ी से गिरना, महंगाई और बिगड़ती आर्थिक स्थिति है।

ईरानी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, कई प्रांतों में हिंसक झड़पों के दौरान लोगों की मौत हुई है। अर्ध-सरकारी फ़ार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि पश्चिमी लोरेस्तान प्रांत में एक पुलिस स्टेशन पर हमला किए जाने के बाद तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हुए। फ़ार्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस मुख्यालय में घुसकर झड़प की और कई पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

इस बीच, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली लारीजानी ने ट्रंप की चेतावनी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईरान के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का अमेरिकी हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र में अराजकता फैला सकता है। खामेनेई के एक अन्य सहयोगी अली शामखानी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा एक रेड लाइन है और यह किसी साहसिक ट्वीट का विषय नहीं है।”

हिंसा के दौरान एक अलग घटना में रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े बसीज बल के 21 वर्षीय स्वयंसेवक की भी मौत की सूचना है। सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने मौत की पुष्टि की, हालांकि विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। वहीं, छात्र समाचार नेटवर्क ने इसके लिए प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया।

प्रदर्शन रविवार को तब शुरू हुए जब व्यापारियों और दुकानदारों ने मुद्रा में तेज गिरावट और बढ़ती कीमतों के खिलाफ आवाज उठाई। ये प्रदर्शन तेहरान सहित लोरेस्तान, फ़ार्स, केरमानशाह, खुज़ेस्तान और हमदान जैसे प्रांतों तक फैल गए। हालात बिगड़ने के बीच ईरान के केंद्रीय बैंक प्रमुख मोहम्मद रज़ा फ़रज़ीन ने इस्तीफा दे दिया, जिसकी पुष्टि सरकारी टेलीविजन ने की।

राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के नेतृत्व वाली ईरान की नागरिक सरकार ने संवाद के संकेत दिए हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि गिरती अर्थव्यवस्था और डॉलर के मुकाबले लगभग 14 लाख रियाल की दर से कमजोर होती मुद्रा पर उनका नियंत्रण सीमित है। मौजूदा हालात 2022 में महसा जीना अमीनी की मौत के बाद हुए व्यापक प्रदर्शनों की याद दिलाते हैं, जब पूरे देश में उथल-पुथल मच गई थी।

ईरान की अर्थव्यवस्था वर्षों से अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव में है, जो 2018 में ट्रंप द्वारा परमाणु समझौते से हटने के बाद और सख्त हो गए थे। मौजूदा विरोध प्रदर्शनों और अंतरराष्ट्रीय बयानबाज़ी ने एक बार फिर ईरान के आंतरिक संकट को वैश्विक राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

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