तेलंगाना की सियासत में बुधवार (3 सितंबर) को बड़ा धमाका हुआ। बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) की नेता के. काविता ने पार्टी से निलंबन के एक दिन बाद न केवल अपने एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया, बल्कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चौंकाने वाले आरोप भी लगाए।
काविता ने अपने ही रिश्तेदार हरिश राव और ज. संतोष कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने न केवल उनके पिता और बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (KCR) के खिलाफ साजिश रची, बल्कि पार्टी को कमजोर करने और परिवार को बांटने की कोशिश भी की। काविता ने कहा, “मेरे पिता मेरी प्रेरणा हैं। उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित किया। क्या ‘बंगारु तेलंगाना’ का सपना सभी वर्गों की भलाई के लिए नहीं था? लेकिन पार्टी के भीतर से ही मेरे खिलाफ झूठा प्रचार चलाया गया।”
उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने कई बार अंदरूनी साजिशों की शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
“मैंने रामन्ना से गुहार लगाई कि पार्टी कार्यालय से मेरे खिलाफ झूठा प्रचार किया जा रहा है। जब मेरे अपने भाई, कार्यकारी अध्यक्ष से भी कोई जवाब नहीं मिला, तब मुझे स्थिति समझ आ गई।”
काविता ने हरिश राव पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली यात्रा के दौरान जब उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के पैर पकड़े, तभी से इन षड्यंत्रों की नींव रखी गई। उन्होंने हरिश राव को “डबल शूटर, ट्रबलशूटर नहीं” बताते हुए कहा कि उनकी पहचान पुराने समय से ही वाई.एस. राजशेखर रेड्डी से रही है।
काविता ने सवाल उठाया कि हरिश राव की फंडिंग कहां से आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कलेश्वरम प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ, जिससे कमाई गई रकम का इस्तेमाल एमएलए को अपने नियंत्रण में रखने और वरिष्ठ नेता ईटाला राजेंद्र, मयनामपल्ली हनुमंथा राव और विजयाशांति के खिलाफ साजिश रचने में किया गया।
काविता ने ज. संतोष कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने हरिता हारम जैसी सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग केवल अपनी छवि चमकाने के लिए किया और मशहूर हस्तियों को ग्रीन चैलेंज के नाम पर गुमराह किया। साथ ही उन्होंने मोकीला में बड़े पैमाने पर विला प्रोजेक्ट्स और सिरसिला में रेत लोरी हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में युवाओं को पुलिस अत्याचार का सामना करना पड़ा।
काविता ने अपने पिता और भाई को चेतावनी दी है, “हरिश राव और संतोष ऐसे लोग हैं जो आपको नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। अगर पार्टी को बचाना है, तो इन्हें किनारे करना होगा। षड्यंत्रों का शिकार मत बनिए।” बीआरएस ने मंगलवार (2 सितंबर) को काविता को निलंबित कर दिया था, जब उन्होंने खुले तौर पर हरिश राव और संतोष कुमार पर षड्यंत्र के आरोप लगाए। पार्टी ने कहा था कि उनके बयान संगठन की नीतियों और सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
काविता का निलंबन और अब इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब पार्टी पिछले कई हफ्तों से आंतरिक उथल-पुथल से गुजर रही है। हाल ही में उन्होंने अपने टीबीजीकेएस (तेलंगाना बोग्गु घनी कर्मिका संगम) के मानद अध्यक्ष पद से हटाए जाने को भी राजनीतिक साजिश बताया था। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं पर केसीआर को भ्रष्टाचार की छवि देने और पार्टी को अंदर से कमजोर करने का आरोप लगाया था। काविता के इस्तीफे से बीआरएस में नई दरारें खुल गई हैं।
यह भी पढ़ें:
भारत उभरता बाजार, चीन वृद्धि दर में मात नहीं दे सकता: मोबियस!
कुख्यात अपराधी मेनपाल ढिल्ला सात साल बाद कंबोडिया से गिरफ्तार!
रूस-यूरोप तनाव में भारत के शांति प्रयासों की जर्मनी ने की सराहना!



