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Friday, March 13, 2026
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हिंदू तिलक की तुलना ‘सेक्स पोजीशन’ से करने पर भड़का न्यायालय!

"खुद को राजा समझने लगे हैं नेता"

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मद्रास हाईकोर्ट ने डीएमके नेता और पूर्व मंत्री के. पोनमुडी को हिंदू धर्म, विशेष रूप से वैष्णव और शैव परंपरा, तथा महिलाओं को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर जमकर लताड़ लगाई है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति वेलमुरुगन ने टिप्पणी की कि अगर तमिलनाडु पुलिस इस मामले में कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो अदालत सीबीआई जांच का आदेश देने पर विचार कर सकती है।

दरअसल, अप्रैल महीने में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पोनमुडी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे एक अशोभनीय मजाक करते नजर आए। इस मजाक में उन्होंने एक सेक्स वर्कर और ग्राहक के बीच हुई काल्पनिक बातचीत के जरिए शैव और वैष्णव समुदायों के धार्मिक तिलकों को सेक्स पोजीशन से जोड़ने वाली बात कही थी। उन्होंने कहा था. “महिलाएँ गलत मत समझिए,” इसके बाद उन्होंने कहा कि एक सेक्स वर्कर एक ग्राहक से पूछती है—“तुम शैव हो या वैष्णव?” फिर वह तिलक का उदाहरण देते हुए पूछती है—”पाट्टई लगाते हो (आड़ा तिलक) या नामम (सीधा तिलक)?”

इस वीडियो को लेकर कई हिंदू संगठनों और नागरिकों में आक्रोश था, जिसके बाद अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान जस्टिस वेलमुरुगन ने कहा, “आजकल इन नेताओं को लगता है कि अनुच्छेद 19 उन्हें कुछ भी कहने की छूट देता है। लेकिन लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी सीमाएं होती हैं। यह देश किसी एक व्यक्ति या पार्टी का नहीं है, बल्कि सभी का है। नेताओं को सार्वजनिक मंचों से बोलते समय जिम्मेदारी का पालन करना चाहिए।”

जस्टिस ने यह भी कहा कि अदालत इस प्रकार की भाषा और विचारधारा को नजरअंदाज नहीं कर सकती, जो समुदायों के बीच टकराव पैदा कर सकती है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अगर राज्य की पुलिस निष्क्रिय रहती है, तो न्यायालय केंद्रीय एजेंसियों को जांच का आदेश देने से पीछे नहीं हटेगा।

गौरतलब है कि पोनमुडी पहले भी विवादास्पद बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस बार अदालत ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक मान्यताओं और महिलाओं के सम्मान से जुड़ी बातों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा की सीमाओं पर एक बार फिर बहस खड़ा कर रहा है।

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