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Saturday, January 24, 2026
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“जो ड्रामा करना चाहते हैं, वे कर सकते हैं। यहां डिलिवरी होनी चाहिए, ड्रामा नहीं।”

शीतकालीन सत्र से पहले पीएम मोदी का विपक्ष को कड़ा संदेश

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शीतकालीन सत्र की पूर्वसंध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए विपक्ष को साफ संदेश दिया कि संसद को राजनीतिक टकराव का मंच बनाने के बजाय राष्ट्रनिर्माण की दिशा में सकारात्मक योगदान के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार का ज़िक्र करते हुए उन्होंने विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे निराशा से बाहर निकलें और अपनी संसदीय भूमिका को जिम्मेदारी से निभाएं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “नेगेटिविटी राजनीति में काम आ सकती है, लेकिन आखिरकार राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक सोच जरूरी होती है। नेगेटिविटी की एक सीमा होनी चाहिए। मैं अपेक्षा करता हूं कि आप राष्ट्र निर्माण पर ध्यान देंगे।” उन्होंने आगे कहा कि जनता की आकांक्षाओं और उम्मीदों को संभालते हुए सभी दलों को संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

पीएम मोदी ने विपक्ष से यह भी कहा कि इस सत्र में बहसें हार-जीत की घबराहट से नहीं, बल्कि देश के भविष्य को ध्यान में रखकर होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “पराजय की घबराहट बहस का आधार नहीं बननी चाहिए। सार्वजनिक जीवन में हमारी जिम्मेदारियां बड़ी हैं और देश की जनता हमसे परिपक्व दृष्टिकोण की उम्मीद करती है।”

प्रधानमंत्री ने बिहार चुनाव के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी पर इशारा करते हुए कहा कि कुछ दल अब भी पराजय के प्रभाव से बाहर नहीं निकल सके हैं। उन्होंने कहा, “मैं सोच रहा था कि इतने दिन बीतने के बाद वे शांत हो गए होंगे, लेकिन कल जो सुनने में आया, उससे लगा कि हार अब भी उन्हें परेशान कर रही है।”

पीएम मोदी ने विपक्ष पर सीधे प्रहार करते हुए कहा, “जो ड्रामा करना चाहते हैं, वे कर सकते हैं। यहां डिलिवरी होनी चाहिए, ड्रामा नहीं। संसद में नारेबाज़ी नहीं, नीति पर जोर होना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि वे विपक्ष को चुनावी प्रदर्शन सुधारने के ‘टिप्स’ भी दे सकते हैं, लेकिन संसद को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यह दावा भी किया कि बीते वर्षों में भारतीय लोकतंत्र के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है। उनके अनुसार, यह सत्र सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक उत्साह और ऊर्जा का प्रतीक है।

शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार 13 विधेयक पेश करने जा रही है, जिनमें से कई को अब तक किसी स्थायी समिति द्वारा परीक्षण के लिए नहीं भेजा गया है। वहीं, विपक्ष सरकार को SIR प्रक्रिया, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हालिया मामलों, वायु प्रदूषण और श्रम कानूनों जैसे मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।

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