साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में 24 वर्षीय छात्रा के साथ हुए गैंगरेप मामले में मुख्य आरोपी मोनोजित मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद उसकी दशकों पुरानी आपराधिक पृष्ठभूमि और दहशत फैलानी वाली गतिविधियों का पर्दाफाश हुआ है। मिश्रा न केवल कॉलेज में महिलाओं को लंबे समय से परेशान करता रहा है, बल्कि सुरक्षा गार्डों पर हमला करने और शिक्षकों को गोली मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोपों में भी घिर चुका है।
यह जघन्य घटना 25 जून की शाम 7:30 बजे से 8:50 बजे के बीच साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज के भीतर हुई थी। पीड़िता परीक्षा से संबंधित कार्यों के लिए कॉलेज पहुंची थी, जहां उसे कॉलेज यूनियन रूम में रुकने को कहा गया। आरोप है कि मोनोजित मिश्रा ने कॉलेज गेट बंद करवा दिया और बाद में सुरक्षा गार्ड के रूम में पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
इस मामले में मोनोजित मिश्रा के अलावा दो मौजूदा छात्र — प्रमित मुखोपाध्याय और ज़ैब अहमद — को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने इस कृत्य का वीडियो बनाकर बाद में ब्लैकमेल करने की योजना बनाई थी। साथ ही, एक कॉलेज गार्ड को भी अपराध में सहयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
मोनोजित मिश्रा, जिसे कॉलेज में ‘मैंगो’ के नाम से जाना जाता था, एक दशक से अधिक समय से कोलकाता के अलग-अलग थानों में छेड़छाड़, हमला, जान से मारने की धमकी, और महिलाओं की गरिमा भंग करने जैसे अपराधों में FIR झेल रहा है।
- 2013 में पहला बड़ा मामला सामने आया, जब मोनोजित मिश्रा पर एक कैटरिंग कर्मचारी को चाकू मारने और उसकी उंगली काटने का आरोप लगा। यह मामला प्रयासपूर्वक हत्या से संबंधित था। इस घटना के बाद मिश्रा लगभग तीन साल तक गायब रहा और पुलिस के हाथ नहीं लगा।
- 2016-2017 में वह दोबारा कॉलेज और छात्र राजनीति में सक्रिय हुआ, लेकिन उसका हिंसक रवैया नहीं बदला। उसके खिलाफ हमला करने और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत दर्ज की गई। इस दौरान उसने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर कॉलेज में फिर से सक्रियता हासिल करने की कोशिश की।
- 2017 में मोनोजित ने TMCP (तृणमूल छात्र परिषद) में दोबारा शामिल होने का प्रयास किया, लेकिन उसके अपराधी इतिहास के कारण संगठन ने उसे अस्वीकार कर दिया। इसके बावजूद वह कॉलेज परिसर में सक्रिय रहा और छात्रों को डराने-धमकाने का काम करता रहा।
- 2019 में गड़ियाहाट पुलिस स्टेशन में एक महिला छात्रा ने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसने आरोप लगाया कि मोनोजित ने कॉलेज परिसर में उसके कपड़े फाड़ दिए। यह घटना कॉलेज में महिला छात्रों के लिए असुरक्षा की बड़ी वजह बन गई थी।
- 31 दिसंबर 2019 को, एक पार्टी के बाद मिश्रा पर आरोप लगा कि उसने एक दोस्त का म्यूजिक सिस्टम और अन्य कीमती सामान चुरा लिया। इस मामले में हरिदेवपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज हुई थी, जो यह दर्शाती है कि उसका आपराधिक व्यवहार कॉलेज के बाहर भी फैला हुआ था।
- 2022 में, कासबा थाना क्षेत्र की एक महिला ने मिश्रा पर शारीरिक शोषण (molestation) का आरोप लगाया। यह शिकायत तब सामने आई जब मिश्रा कॉलेज छोड़कर भी कॉलेज के आसपास सक्रिय रहा करता था।
- 2024 में मिश्रा पर एक कॉलेज गार्ड पर हमला करने और कॉलेज की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा। इस मामले में पुलिस में शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उसका मनोबल और बढ़ा।
- 2025 में उसके खिलाफ एक पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट करने की शिकायत भी दर्ज की गई। यह इस बात का प्रमाण है कि उसका अपराध अब सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह कानून व्यवस्था के प्रतिनिधियों को भी निशाना बनाने लगा था।
कॉलेज के सूत्रों के अनुसार, जो भी शिक्षक मोनोजित की गैर-हाजिरी या भ्रष्टाचार पर सवाल उठाते थे, उन्हें धमकियां दी जाती थीं। कई शिक्षक डर के कारण पुलिस तक जाने की हिम्मत नहीं कर पाए। 2022 में TMCP का एक सदस्य कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल को गुमनाम चिट्ठी लिखकर मोनोजित के आपराधिक रिकॉर्ड को उजागर करते हुए चेतावनी दी थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मोनोजित मिश्रा: राजनीति और अपराध का गठजोड़
मोनोजित मिश्रा ने 2022 में साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वह अलीपुर लॉ कॉलेज में वकालत करने लगा और धीरे-धीरे एक सक्रिय वकील के रूप में उभरने लगा। लेकिन कानून का छात्र और अब वकील होने के बावजूद, उसका व्यवहार आपराधिक प्रवृत्तियों से भरा रहा।
छात्र राजनीति में भी उसकी भूमिका विवादास्पद रही। वह तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (TMCP) की दक्षिण कोलकाता जिला इकाई में ‘ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी’ के पद पर कार्यरत था, जिससे उसे राजनीतिक पहुंच और दबदबा प्राप्त था। गैंगरेप की घटना के सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने उसकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं और उसके साथ-साथ दो अन्य सह-अभियुक्त छात्रों को भी कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया है।
वहीं, बुधवार को बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल ने भी मोनोजित मिश्रा की वकील सदस्यता को रद्द कर दिया और उसका नाम अपने आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया। इस प्रकार, एक संगठित राजनीतिक और पेशेवर पहचान रखने वाला यह शख्स अब पूरी तरह से कानून के शिकंजे में आ चुका है।
इस जघन्य अपराध के बाद विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोनोजित जैसे आपराधिक प्रवृत्ति के लोग सत्ता पक्ष की छात्र शाखा के संरक्षण में पनपते हैं। हालांकि, TMC ने इससे कोई संबंध होने से इनकार किया है और कहा है कि कानून अपना काम करेगा।
मोनोजित मिश्रा की गिरफ्तारी के साथ ही कोलकाता के एक प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज में सालों से चले आ रहे डर, दबाव और अपराध के माहौल का पर्दाफाश हुआ है। कॉलेज प्रशासन, छात्र संगठन और सुरक्षा तंत्र की चुप्पी और लापरवाही ने इस अपराधी को वर्षों तक फलने-फूलने दिया।
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