‘ऑपरेशन सिंदूर तो बच्चों का वीडियो गेम था’: कांग्रेस नेता

भाजपा का तीखा पलटवार

‘ऑपरेशन सिंदूर तो बच्चों का वीडियो गेम था’: कांग्रेस नेता

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कांग्रेस नेता नाना पटोले के हालिया बयान ने देश की राजनीति में जबरदस्त हलचल मचा दी है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर उनकी विवादित टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे सेना का अपमान और राष्ट्र विरोधी मानसिकता करार दिया है।

नाना पटोले ने मीडिया से बातचीत में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर को अमेरिका के इशारे पर रोका गया। ट्रंप ने कई बार कहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों को व्यापारिक प्रतिबंध की धमकी देकर संघर्ष रोकने को कहा था। इसका मतलब तो यह हुआ कि यह पूरा ऑपरेशन बच्चों के कंप्यूटर गेम जैसा था।”

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि “पहलगाम में जब 26 तीर्थयात्रियों की हत्या हुई, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक इस पर कोई बयान क्यों नहीं दिया? हमारी 26 बहनों का सिंदूर उजड़ गया और आतंकवादी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं।”

पटोले के इस बयान के तुरंत बाद भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर को वीडियो गेम कहना सिर्फ हमारे सैनिकों के साहस का अपमान नहीं है, बल्कि पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों का मनोबल बढ़ाने वाला है। कांग्रेस का हाथ फिर एक बार पाकिस्तान के साथ दिखाई दे रहा है।”

बावनकुले ने कहा कि यह ऑपरेशन एक साहसिक जवाब था पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ, न कि कोई मंचित ड्रामा। उन्होंने कांग्रेस पर पहले सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सवाल उठाने और अब आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को ‘खेल’ कहने का आरोप लगाया। “इस तरह के बयान न सिर्फ देश की सेना का अपमान हैं, बल्कि शहीदों के परिवारों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाते हैं। नाना पटोले और उनकी सोच को देश कभी माफ नहीं करेगा,” उन्होंने लिखा।

पटोले के बयान ने न सिर्फ सियासी बवाल खड़ा कर दिया है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी देशभर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोगों ने कांग्रेस नेतृत्व से इस पर स्पष्टीकरण की मांग की है, वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है।

गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हाल ही में भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवाद के ठिकानों के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई थी, जिसे पहलगाम आतंकी हमले के जवाब के तौर पर अंजाम दिया गया था।इस पूरे विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीति में सेना के ऑपरेशनों को इस तरह ‘हल्के’ अंदाज में लेना जनभावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता नहीं है?

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