विद्यार्थी को सिर्फ कोर्स के लायक जरूरी क्रेडिट हासिल करने होंगे। क्रेडिट का आशय एक सप्ताह में उस विषय की पढ़ाई जाने वाली कक्षाओं से होता है। अगर विद्यार्थी इन कक्षाओं के साथ ही किसी प्रोजेक्ट, असाइनमेंट या सेमिनार आदि के माध्यम से क्रेडिट हासिल करता है तो उनको भी डिग्री की गणना में शामिल किया जाता है। इसी के आधार पर विद्यार्थी को तीन साल से कम अवधि में ही डिग्री हासिल करने की अनुमति मिल जाती है। एब्रेबिवेटेड डिग्री प्रोग्राम कहा जाता है।
कोर्स की अवधि बढ़ाने की भी मिलेगी सुविधा: एब्रेबिवेटेड डिग्री प्रोग्राम के साथ ही एक्सटेंडेट डिग्री प्रोग्राम की शुरुआत भी होगी। इसमें डिग्री की अवधि कम करने के बजाय छह महीने बढ़ाने का माैका भी मिलता है। इसमें बढ़ी हुई अवधि में विद्यार्थी जरूरी क्रेडिट हासिल कर लेता है।
क्रेडिट में बदल सकेगा पेशेवर अनुभव: नई शिक्षा नीति में यह व्यवस्था भी है कि एकेडमिक क्रेडिट बैंक के माध्यम से विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ने के बाद दोबारा वहीं से शुरू कर सकता है। इसके साथ ही यह सुविधा भी उपलब्ध है कि पेशेवर अनुभव वाले विद्यार्थी को पढ़ाई में भी उसका फायदा मिले।
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