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Friday, January 23, 2026
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यूपी के स्कूलों के लिए नया आदेश, सभी जिलों में लागू! 

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों, निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 (RTE Act), और बाल संरक्षण आयोग की सिफारिशों के अनुपालन में जारी किया गया है।

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उत्तर प्रदेश के सभी प्राथमिक स्कूलों में अब छात्रों को डराना, धमकाना या अनुशासन के नाम पर किसी भी तरह का शारीरिक और मानसिक दंड देना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
 
बेसिक शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को एक अहम कदम उठाते हुए सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले। 
 
यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के आदेशों, निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 (RTE Act), और बाल संरक्षण आयोग की सिफारिशों के अनुपालन में जारी किया गया है।
 
शिक्षा विभाग के अनुसार, निम्नलिखित व्यवहार अब पूरी तरह निषिद्ध हैं: बच्चों को मारना-पीटना या किसी भी प्रकार की शारीरिक सजा देना। बच्चों को अपमानित करना या तिरस्कारपूर्ण भाषा का प्रयोग। आंख दिखाना या धमकाने वाला रवैया अपनाना। किताब या कापी न लाने पर कक्षा में खड़ा करना। 
 
जाति, लिंग या सामाजिक आधार पर भेदभाव करना, छात्रों द्वारा एक-दूसरे को प्रताड़ित करने की घटनाओं को नजरअंदाज करना। शासन का साफ संदेश है कि बच्चों के आत्मसम्मान और मानसिक विकास के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
 
जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि 12 मार्च 2024 को जारी शासनादेश की प्रति सभी प्राथमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्रबंधकों तक पहुंचाई जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी शिक्षक इस आदेश की जानकारी रखें और उसका पालन करें।
 
शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्हें बताया जाए कि RTE एक्ट और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 के तहत वे किन परिस्थितियों में शिकायत कर सकते हैं और उनके अधिकार क्या हैं।
 
यदि किसी छात्र, अभिभावक या आम नागरिक को किसी स्कूल में बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार की जानकारी मिले, तो वे टोल फ्री नंबर 1800-889-3277 पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह सेवा जून 2024 में शुरू की गई थी और अब इसे सभी स्कूलों में नोटिस बोर्ड और मुख्य द्वार पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।
 
शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विद्यालय में इस आदेश का उल्लंघन पाया गया या बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत सही साबित हुई, तो संबंधित शिक्षक या प्रबंधन के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों को भयमुक्त, संवेदनशील और सम्मानजनक शैक्षिक माहौल प्रदान करना है।
 
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