पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिंसक भीड़ द्वारा घेराव के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस के दो नेताओं को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार नेताओं में कालियाचक-1 ब्लॉक के TMC अध्यक्ष सारिउल शेख और सुजापुर क्षेत्र के पूर्व TMC अध्यक्ष यूसुफ शेख शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, अप्रैल महीने में मालदा के कालियाचक इलाके में सात न्यायिक अधिकारियों को मुस्लिम भीड़ द्वारा घेरने, उनके वाहनों को रोकने और उन पर हमला करने का मामला सामने आया था। इसी मामले में लंबी पूछताछ के बाद शुक्रवार को NIA ने दोनों नेताओं को हिरासत में लिया। शनिवार को उन्हें कोलकाता लाया गया।
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले NIA ने कुल नौ नेताओं को नोटिस भेजा था। इनमें सुजापुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार सबीना यास्मीन के चुनाव एजेंट अब्दुर रहमान, ब्लॉक अध्यक्ष सारिउल शेख, पूर्व फूड सुपरिंटेंडेंट हाजी केताबुद्दीन शेख और यूसुफ शेख के नाम शामिल थे।
शुरुआत में कई नेताओं ने मतगणना में व्यस्तता का हवाला देकर NIA के सामने पेश होने में अनिच्छा दिखाई थी, लेकिन बाद में उन्हें एजेंसी के समक्ष उपस्थित होना पड़ा।
पूछताछ के दौरान NIA ने गिरफ्तार नेताओं के मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि दोनों नेताओं का संबंध उस विरोध प्रदर्शन से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है, जिसमें न्यायिक अधिकारियों की गाड़ियों को मोथाबाड़ी में रोका गया था और सुजापुर अस्पताल के पास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 12 को जाम किया गया था।
बताया जा रहा है कि सारिउल शेख का सुजापुर अस्पताल के पास एक नर्सिंग होम है और न्यायिक अधिकारियों की गाड़ियों को रोकने वाली भीड़ उसी नर्सिंग होम के सामने जमा हुई थी। NIA के अनुसार, गिरफ्तार नेताओं को 1 अप्रैल को मोथाबाड़ी स्थित BDO कार्यालय में न्यायिक अधिकारियों को कथित रूप से रोके जाने और उसी रात सुजापुर व चौरींगी मोड़ पर नेशनल हाईवे-12 जाम करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
इस मामले में एक अन्य बड़ी गिरफ्तारी मंजिर उर्फ भोला शेख की भी हुई है, जो सुजापुर ग्राम पंचायत के हलपाड़ा इलाके का निवासी बताया जा रहा है।
जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर पांच अलग-अलग स्थानों पर किए गए अवरोध के पीछे क्या साजिश थी और क्या यह कार्रवाई पहले से योजनाबद्ध थी। NIA यह भी जांच कर रही है कि भीड़ को किसने संगठित किया और न्यायिक अधिकारियों को निशाना बनाने के पीछे मकसद क्या था।
मालदा हिंसा मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मामले को कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संरक्षण से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं, जबकि जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क और कथित साजिश की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
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