मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ ने रविवार सुबह हुए एक वर्चुअल संसदीय सत्र के दौरान ईरान-अमेरिका समझौते को लेकर ये बयान दिया। गालिबाफ ने ईरानी संसद के प्रेसिडियम के साथ दोबारा चुने गए स्पीकर के तौर पर शपथ ली। कुछ देशों की राजनीतिक सभाओं में कार्यकारी अधिकारियों की एक परिषद होती है जो सामूहिक रूप से अध्यक्ष के साथ या उसके स्थान पर अपने कामकाज का संचालन करती है।
इसके बाद उन्होंने कहा, “दुश्मन की बातों और वादों पर कोई भरोसा नहीं है। हमारा एकमात्र क्राइटेरिया यह है कि बदले में अपने कमिटमेंट पूरे करने से पहले ठोस नतीजे हासिल करें।”
बीते दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अपने आखिरी चरण में है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ईरान में मलबे में दबे हुए संवर्धित यूरेनियम को निकालेगा और वहां से लेकर आएगा, हालांकि ईरान ने इन सभी दावों को खारिज कर दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया है कि ईरान इस बात के लिए राजी हो गया है कि वो परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही हासिल करेगा।
इस्माइल बाघेई ने दोहराया कि बातचीत में ईरान का मौजूदा ध्यान युद्ध को खत्म करने पर है। उन्होंने कहा, “इस चरण पर हम ईरान के यूरेनियम संवर्धन या समृद्ध यूरेनियम से जुड़े मुद्दों के विवरण पर कोई बात नहीं कर रहे हैं।”
होर्मुज स्ट्रेट के संभावित रूप से फिर से खुलने के बारे में बात करते हुए इस्माइल बाघेई ने कहा कि इस स्ट्रेट का भविष्य का प्रबंधन सिर्फ ईरान और ओमान से संबंधित है। इससे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी मांगें बताते हुए कहा, “ईरान को इस बात पर सहमत होना होगा कि उनके पास कभी कोई परमाणु हथियार या बम नहीं होगा।”
ईरान की ताकत को दुश्मनों ने कम आंका, अब फैसला अमेरिका को करना है: आईआरजीसी!
