जिस मुद्दे पर बोलना होता है, उस पर क्यों नहीं कुछ बोलते? बोलना है तो कल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय राय और महिला नेता के बवाल पर बोलिए। कहिए कि इमरान मसूद के गिरेबान पर हाथ लगाना ठीक था या नहीं।”
ओपी राजभर ने लिखा, “बताइए प्रमोद तिवारी का हाथ जोड़कर माफी मांगना सही था या नहीं? कहिए कि आपके दोस्त कांग्रेस के नेताओं का भद्दी-भद्दी गालियां देना सही था या नहीं? खैर, आ रहा है 2027… इस बार आपका और आपके दोस्तों का बड़बोलापन और अहंकार दोनों मटियामेट हो जाएगा। यूपी का स्वाभिमान जीतेगा, 2027 में यूपी जीतेगा।”
आईएएनएस से बातचीत करते हुए ‘इंडिया’ गठबंधन के मार्च पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “विपक्षी गठबंधन के पास कोई काम नहीं है और उनके पास जनता का समर्थन भी नहीं है। ऐसे में इन लोगों की ओर से मार्च ही निकाला जाएगा। इसके अलावा उन लोगों के पास कोई काम नहीं है। विपक्ष का आरोप निराधार है, ‘इंडिया’ गठबंधन के पास एक भी सबूत नहीं है।”
ओपी राजभर ने कहा, “ज्ञानेश कुमार एक वर्ष से मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर हैं। उत्तर प्रदेश में 10 वर्ष से समाजवादी पार्टी गायब है और 30 वर्ष से कांग्रेस गायब है। पश्चिम बंगाल में 40 वर्ष से कांग्रेस गायब है।
असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “असदुद्दीन ओवैसी जो भी कहते हैं, वह सही है। मुसलमान बेवजह समाजवादी पार्टी का झंडा उठा रहे हैं। उन्हें खुद से पूछना चाहिए कि वे कब तक दरी बिछाते रहेंगे। ओवैसी का झंडा लेकर मैदान में उतरो, फिर यह दिलचस्प होगा। मेरा कहना है कि मुस्लिम समाज को हमसे सीखना चाहिए।
सामान्य वर्ग को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में लाने के लिए सामान्य वर्ग ने कड़ी मेहनत की और चौराहों पर लंबी चर्चा की और सत्ता में ले आए। उनका इरादा अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनाने का था और अब मंदिर बन गया है।
जेपीएनआईसी को लेकर ओपी राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव की ओर से जेपीएनआईसी को अपना उद्योग बना लिया गया था। जेपीएनआईसी का 200 करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट तैयार हुआ था। धीरे-धीरे 865 करोड़ रुपए तक अखिलेश यादव ले गए।
उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव को इस पर जवाब देना चाहिए कि 200 से 865 करोड़ रुपए खर्च किया गया। वो रुपया कहां गया? उनकी ओर से ‘पीडीए’ की बात की जाती है, साथ लेकर कहां चलते हैं। वे न कभी ‘पंडित जी’ के हो पाए, न पिछड़ों के हो पा रहे हैं, न तो दलितों के हो पा रहे हैं। उन्होंने तो ‘पीडीए’ की परिभाषा ही बदल दी है। उनके ‘पीडीए’ का असली फॉर्मूल ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ है।
