नगर निगम सभागार में आयोजित इस विशेष बैठक में कुल 11 मुद्दों पर चर्चा रखी गई थी। इनमें चौथे क्रमांक पर प्रभाग समिति A से I के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर RCC पाइप नाले निर्माण के लिए प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी देकर ई-टेंडर जारी करने का प्रस्ताव शामिल था। इस विषय पर विपक्ष के नेता मनोज पाटिल ने आंकड़ों के साथ तीखे सवाल उठाते हुए सत्ताधारी पक्ष और प्रशासन की कड़ी आलोचना की।
पाटिल ने प्रस्ताव की पोल खोलते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में नाले निर्माण के लिए कुल 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसमें से 39 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पहले ही मंजूर किए जा चुके हैं, जिसके बाद नगर निगम के पास केवल 21 करोड़ रुपये की ही राशि बची है।
ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि जब केवल 21 करोड़ रुपये की व्यवस्था शेष है, तो 223 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मंजूरी के लिए कैसे लाए गए? उन्होंने पूछा कि बिना आर्थिक प्रावधान के ये विकास कार्य कैसे पूरे किए जाएंगे? जो काम वास्तव में संभव नहीं हैं, उन्हें सिर्फ कागजों पर मंजूरी देकर जनता को भ्रमित क्यों किया जा रहा है?
गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नालों के निर्माण हेतु 90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यानी दोनों वर्षों की कुल उपलब्ध राशि 111 करोड़ रुपये ही होती है। इसके बावजूद लगभग दोगुनी राशि यानी 223 करोड़ रुपये के प्रस्ताव किस आधार पर और किस कानूनी प्रावधान के तहत लाए गए, इसका संतोषजनक जवाब न तो महापौर अजीव पाटिल दे सके और न ही प्रशासन।
आयुक्त द्वारा दिया गया जवाब भी संतोषजनक नहीं था। वहीं महापौर ने प्रशासन को यह अजीब सुझाव दिया कि आगे से प्रस्तावों में धाराएं न जोड़ी जाएं। इस पर मनोज पाटिल ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि हर प्रस्ताव नियमों के अनुसार ही प्रस्तुत होना चाहिए।
पाटिल ने आरोप लगाया कि केवल बहुमत के बल पर बिना आर्थिक योजना के प्रस्ताव मंजूर करना वसई-विरार की जनता के साथ सीधी धोखाधड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि इन प्रस्तावों में पूरे वसई-विरार क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है और जमा होने वाले पानी की निकासी के लिए भी प्रशासन के पास कोई ठोस योजना नहीं है।
उनके अनुसार ये प्रस्ताव केवल कुछ खास लोगों को खुश करने और जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए लाए गए हैं। विशेष विकास निधि के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये और इसके अतिरिक्त 138 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कार्यों को भी मंजूरी के लिए पेश किया गया था।
पाटिल ने कहा कि पिछले 10 वर्षों का इतिहास बताता है कि बिना आर्थिक व्यवस्था के केवल जनता को भ्रमित करने के लिए प्रस्ताव मंजूर किए जाते हैं, लेकिन बाद में धन की कमी के कारण ये काम कभी पूरे नहीं हो पाते।
उन्होंने मांग की कि आगे से प्रशासन केवल उन्हीं कार्यों को मंजूरी दे, जिनके लिए पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था हो और जो वास्तव में प्राथमिकता वाले हों। इस बार की महासभा में मजबूत विपक्ष की वजह से सत्ताधारियों और प्रशासन की कथित लापरवाही उजागर हुई, और सवालों के जवाब देते समय उनकी स्थिति काफी असहज दिखाई दी।
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